दिल्ली में यमुना नदी के किनारों को अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट की तरह संवारने की योजना पर काम तेज हो गया है. सरकार पल्ला से कालिंदी कुंज तक यमुना के किनारे वॉकिंग ट्रैक, साइकिलिंग ट्रैक, स्पोर्ट्स ग्राउंड और सुंदर पब्लिक स्पेस बनाने की तैयारी कर रही है. हालांकि यह परियोजना अभी शुरुआती स्तर पर है और नदी का भारी प्रदूषण इसके रास्ते की बड़ी रुकावट बना हुआ है. दिल्ली के जल मंत्री परवेश वर्मा ने बताया कि सरकार ने ‘साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’ के साथ करार (MoU) करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया है और इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट्स की नियुक्ति की जा रही है. मंत्री ने अगस्त महीने में दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के साथ खुद अहमदाबाद जाकर साबरमती रिवरफ्रंट का मुआयना किया था.
दो चरणों में तैयार होगा रिवरफ्रंट
इस पूरे प्रोजेक्ट को वजीराबाद बैराज के जरिए दो हिस्सों में बांटा जाएगा.
- पहला चरण: पल्ला से वजीराबाद तक का हिस्सा पहले विकसित होगा, जिसे पूरे रिवरफ्रंट के लिए एक मॉडल के रूप में पेश किया जाएगा.
- दूसरा चरण: वजीराबाद से ओखला बैराज के पास कालिंदी कुंज तक काम पूरा किया जाएगा.
इस योजना का मुख्य मकसद यमुना के किनारों को आम जनता के लिए सुलभ बनाना है, ताकि लोग सुबह की सैर, योग, साइकिलिंग और खेलकूद का आनंद ले सकें. मंत्री ने कहा कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो सरकार के मौजूदा कार्यकाल के भीतर ही जनता को इसका मॉडल देखने को मिल जाएगा.
सबसे बड़ी चुनौती: यमुना की सफाई
रिवरफ्रंट का विकास अपनी जगह है, लेकिन यमुना का मैला पानी सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है. दिल्ली में यमुना करीब 52 किलोमीटर बहती है, जिसमें वजीराबाद से ओखला के बीच का 22 किलोमीटर का दायरा सबसे ज्यादा प्रदूषित है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में वजीराबाद और निजामुद्दीन पुल सहित तीन निगरानी केंद्रों पर सीवेज जनित प्रदूषण (Faecal Contamination) में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
परवेश वर्मा के अनुसार, पिछले 18 महीनों में दिल्ली के 37 में से 28 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) को अपग्रेड किया गया है. क्षमता की कमी को दूर करने के लिए 250 MGD अतिरिक्त सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता जोड़ी जा रही है. उन्होंने दावा किया कि सीवेज प्रोजेक्ट्स पूरे होने के बाद लगभग ढाई साल में यमुना साफ नजर आने लगेगी.