केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है.
अब रिटायरमेंट के आखिरी दिनों में या रिटायर्ड होने के बाद कर्मचारियों की पेंशन या सैलरी से अचानक होने वाली रिकवरी (कटौती) पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) ने इस संबंध में सभी मंत्रालयों और विभागों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं.
आइए समझते हैं कि सरकार का यह नया नियम क्या है और इससे केंद्रीय कर्मचारियों को क्या-क्या फायदे होंगे.
नया नियम क्या है?
नए निर्देशों के मुताबिक, अब सभी सरकारी विभागों को अपने कर्मचारियों के रिटायरमेंट से ठीक 4 साल पहले ही उनके सर्विस रिकॉर्ड, पे-फिक्सेशन (वेतन निर्धारण) और पेंशन से जुड़ी सभी कागजातों की बारीकी से जांच करनी होगी.
किन लोगों को मिलेगा फायदा?
सरकार के इस फैसले से करीब 33.9 लाख मौजूदा पेंशनरों और 36.5 लाख कार्यरत कर्मचारियों यानी कुल मिलाकर लगभग 70 लाख लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा.
गलती करने वाले अधिकारियों की जेब से कटेगा पैसा
अक्सर देखा जाता था कि रिटायरमेंट के समय पे-फिक्सेशन या इंक्रीमेंट में सालों पुरानी गलती बताकर कर्मचारियों के ग्रेच्युटी या पेंशन के पैसे से अचानक लाखों रुपये काट लिए जाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.अब पे एंड अकाउंट्स ऑफिस (PAO) से सर्विस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद किसी भी कर्मचारी से कोई वसूली नहीं की जा सकती. अगर वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी पे-फिक्सेशन या पेंशन कैलकुलेशन में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसकी भरपाई कर्मचारी से करने के बजाय उस अधिकारी से की जाएगी जिसने उस फाइल को मंजूरी दी थी. प्रमोशन, इंक्रीमेंट या ACP/MACP मिलने के बाद जारी पे-फिक्सेशन आदेशों की जांच अब 3 महीने के भीतर या उसी वित्त वर्ष के अंत तक पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है.
पेंशन बजट में लगातार बढ़ोतरी
कैग (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में केंद्र सरकार का कुल पेंशन खर्च 12.3% बढ़कर ₹3.46 लाख करोड़ पर पहुंच गया है. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी रक्षा पेंशन (45.57%) और सिविल पेंशन (33.57%) की है. पेंशन के बढ़ते बजट और कानूनी विवादों को कम करने के लिए ही सरकार ने रिकॉर्ड चेकिंग का यह नया और पारदर्शी नियम लागू किया है.
सरकार का यह कदम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है. अब कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त अचानक किसी रिकवरी या कागजी उलझन का डर नहीं रहेगा और वे सम्मान के साथ अपनी सेवानिवृत्ति (Retire) का लाभ उठा सकेंगे.