अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है. शुक्रवार, 23 अक्टूबर की सुबह एशियाई बाजारों में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $113 प्रति बैरल के पार निकल गईं. वहीं, अमरीकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी $99 प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है.
सऊदी अरब में तेल ठिकानों पर हुए हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है. जानिये कच्चे तेल की कीमतों में आए इस नए उबाल की मुख्य वजहें क्या हैं और बाजार के जानकार आगे क्या अनुमान लगा रहे हैं.
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के 5 बड़े कारण
सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हूती हमले:
हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरामको के यनबू पोर्ट, शयबाह ऑयल फील्ड और पूर्वी क्षेत्र के किंग फहद एयरपोर्ट पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है. इसके बाद अरामको ने धहरान स्थित अपने मुख्यालय को एहतियातन खाली कराकर कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने को कहा है.
अमेरिका-ईरान के बीच नया तनाव:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है और आगे और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान पर नए हमलों की योजना बना रहे हैं.
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में खतरा जारी:
फारस की खाड़ी से तेल की आवाजाही भले ही पहले के स्तर पर लौट रही हो, लेकिन वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों पर हमले भी तेजी से बढ़े हैं, जिससे सप्लाई चेन फिर से संकट में पड़ गई है.
अमेरिका में डीजल का रिकॉर्ड संकट:
रिफाइंड ऑयल प्रोडक्ट्स की कमी के चलते अमरीका में डीजल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. इसके चलते ट्रंप प्रशासन ने रूस से डीजल आयात के लिए एक विशेष डील की है और 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दी है.
रूस-यूक्रेन युद्ध का दबाव:
यूक्रेन द्वारा रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) पर किए जा रहे हमलों के कारण भी वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति बाधित होने का डर बना हुआ है.
क्या आगे गिर सकते हैं कच्चे तेल के दाम?
खबरों के कारण फ्यूचर्स मार्केट में भले ही दाम बढ़ रहे हों, लेकिन फिजिकल क्रूड (Dated Brent) के दाम पिछले दो हफ्तों में $15 घटकर लगभग $120 प्रति बैरल के पास आ गए हैं.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फारस की खाड़ी से सप्लाई बिना रुकावट जारी रहती है और समुद्री शिपिंग भाड़ा (Freight Rates) कम होता है, तो आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है. हालांकि, युद्ध और हमलों की अनिश्चितता के कारण फिलहाल जोखिम बना हुआ है.
क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल डीजल
फिलहाल इसे लेकर सरकारी तेल कंपनियों ने अपना कोई रुख नहीं बताया है. लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर पेट्रोल डीजल की कीमतों पर भी होगा. सरकारी तेल कंपनियां, जैसे कि ऑयल इंडिया, एचपी आदि महीने की 1 तारीख को पेट्रोल डीजल की कीमतों में बदलाव करती हैं.