भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) में बढ़ोतरी का ऐलान करते ही दलाल स्ट्रीट में निवेशकों के पसीने छूट गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 72,592 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 185 अंक से ज्यादा फिसलकर 22,590 के आसपास कारोबार करता दिखा.
क्यों आई बाजार में गिरावट?
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस तेज गिरावट के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण रहे:
- RBI का सख्त रुख : आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है. फरवरी 2023 के बाद यह पहला मौका है जब ब्याज दरें बढ़ाई गई हैं. सबसे ज्यादा चिंता केंद्रीय बैंक के रुख (Stance) को लेकर है. आरबीआई ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है. निवेशकों को डर है कि आगे भी ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं.
- कच्चे तेल में उबाल: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा बढ़ गया है.
- रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपया फिसलकर 96.84 के स्तर तक पहुंच गया, जो अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है.
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर मजबूत होने के चलते विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं.
किन शेयरों पर सबसे ज्यादा मार?
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर रियल एस्टेट, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर पर पड़ा. निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.7% और ऑटो इंडेक्स 1.4% तक टूट गया. वहीं, सितंबर तिमाही में कमजोर बिक्री की वजह से टाइटन का शेयर करीब 4% लुढ़ककर 3 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, ब्याज दरें बढ़ने से मार्जिन सुधरने की उम्मीद में पीएसयू बैंक शेयरों में हल्की मजबूती देखी गई.
रेपो रेट क्या होता है?
सीधे शब्दों में कहें तो जिस तरह आपको जब पैसों की जरूरत होती है तो आप बैंक से कर्ज लेते हैं और उस पर ब्याज चुकाते हैं. ठीक उसी तरह, देश के कॉमर्शियल बैंकों को जब अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नकदी की कमी होती है, तो वे रिजर्व बैंक (RBI) से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं. जिस ब्याज दर पर रिजर्व बैंक इन बैंकों को कर्ज देता है, उसे ही रेपो रेट कहा जाता है.
रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन क्यों महंगा करते हैं?
जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ा देता है तो बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है. बैंकों की उधारी लागत बढ़ जाती है. अपना मुनाफा और संतुलन बनाए रखने के लिए बैंक इस बढ़े हुए बोझ को ग्राहकों पर डाल देते हैं.
नतीजतन, बैंक अपने सभी फ्लोटिंग रेट आधारित कर्जों जैसे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं.
आपकी जेब और ईएमआई पर क्या असर पड़ेगा?
अगर आपने फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया है तो रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर आपकी ईएमआई पर पड़ता है. बैंक आपकी मौजूदा मासिक किस्त (EMI) की राशि बढ़ा सकते हैं. अक्सर बैंक मासिक किस्त बढ़ाने के बजाय लोन चुकाने के कुल महीनों की संख्या बढ़ा देते हैं, जिससे आपको लंबे समय तक ब्याज भरना पड़ता है. नया घर या गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज मिलेगा.