भारत में रेलवे की शुरुआत सिर्फ लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए नहीं हुई थी. अंग्रेजों का मकसद व्यापार बढ़ाना और देश के अलग-अलग हिस्सों तक अपनी पकड़ मजबूत करना भी था. रेलवे से उन्हें सामान और कच्चा माल बंदरगाहों तक पहुंचाने में आसानी होती थी. सेना को एक जगह से दूसरी जगह भेजना भी आसान हो गया था.
किस कंपनी को मिला था रेलवे बनाने का काम?
भारत में रेलवे लाइन बिछाने की जिम्मेदारी ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) को मिली थी. इस कंपनी की स्थापना 1849 में हुई थी. उस समय भारत के बड़े हिस्से पर ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन था. शुरुआत में ब्रिटिश कंपनियों ने रेलवे बनाने में पैसा लगाया. सरकार ने उन्हें तय ब्याज देने की गारंटी दी थी. इससे कंपनियों को नुकसान का डर कम हुआ और कई कंपनियां रेलवे निर्माण से जुड़ गईं.
1853 में चली थी पहली यात्री ट्रेन
भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को चली थी. यह ट्रेन मुंबई के बोरीबंदर स्टेशन से ठाणे के बीच चली थी. करीब 34 किलोमीटर के इस सफर में ट्रेन को तीन भाप के इंजन खींच रहे थे. इसमें 14 डिब्बे थे और करीब 400 यात्रियों ने सफर किया था. इसके बाद देश के दूसरे हिस्सों में भी रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ. 1864 में कलकत्ता से दिल्ली के बीच रेल लाइन शुरू हुई. 1867 में इलाहाबाद से जबलपुर के बीच रेल संपर्क बना.
अकाल और व्यापार में रेलवे की भूमिका
1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने रेलवे पर अपना नियंत्रण बढ़ाना शुरू किया. 1869 से 1881 के बीच रेलवे निर्माण में सरकार की भूमिका बढ़ गई. रेलवे से अंग्रेजों को व्यापार में काफी फायदा हुआ. अनाज और दूसरी जरूरी चीजें दूर के इलाकों तक पहुंचाना आसान हुआ. 1880 तक भारत में रेलवे नेटवर्क करीब 9,000 मील लंबा हो चुका था.
रेलवे में बढ़ने लगीं सुविधाएं
1890 के दशक में ट्रेनों में यात्रियों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाने लगा. ट्रेनों में शौचालय, गैस लैंप और बाद में बिजली की रोशनी जैसी सुविधाएं शुरू हुईं. यात्रियों की संख्या बढ़ने पर चौथी श्रेणी के डिब्बे भी चलाए गए.
1901 के बाद सरकार का बढ़ा नियंत्रण
1901 में रेलवे से मुनाफा होना शुरू हुआ. इसी साल रेलवे बोर्ड की स्थापना की गई. 1907 तक सरकार ने कई बड़ी रेलवे लाइनों को अपने नियंत्रण में ले लिया और निजी कंपनियों को उन्हें चलाने की जिम्मेदारी दी. बाद में रेलवे का प्रबंधन और ज्यादा व्यवस्थित किया गया. 1923 में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे और ईस्ट इंडियन रेलवे का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया. इस तरह अंग्रेजों के व्यापार और शासन को आसान बनाने के लिए शुरू हुआ रेलवे नेटवर्क धीरे-धीरे भारत के अलग-अलग शहरों और कस्बों को जोड़ने वाली बड़ी परिवहन व्यवस्था बन गया.