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UP Police Constable Bharti 2018: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार की अपीलें खारिज कीं, 7 साल बाद सैकड़ों को मिलेगा नियुक्ति पत्र

UP Police Constable Bharti 2018 News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2018 यूपी पुलिस सिपाही भर्ती में आरक्षण विवाद पर राज्य सरकार की 4 विशेष अपीलें खारिज कीं. जानें ओबीसी और अन्य अभ्यर्थियों के चयन व जॉइनिंग से जुड़ा नया अपडेट.

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हाई कोर्ट ने अभ्यर्थियों की दलीलों को सही माना और राज्य सरकार की अपीलों को खारिज करते हुए अभ्यर्थियों के हक में फैसला सुनाया. (Photo - AI)

उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल बनने का सपना देख रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट से बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. हाई कोर्ट ने UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018 में आरक्षण के नियम को लेकर राज्य सरकार की चार विशेष अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की दो जजों की खंडपीठ के इस फैसले के बाद, अब उन योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है जिन्हें अधिक अंक मिलने के बावजूद चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था.जान‍िये ये पूरा मामला क्या था, आरक्षण के नियम को लेकर विवाद क्यों हुआ और हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है.

क्या था 2018 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती का पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश पुलिस में सिविल पुलिस के 23,520 और पीएसी (PAC) के 18,000 पदों को मिलाकर कुल 41,520 कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए 14 जनवरी 2018 को विज्ञापन निकाला गया था. इस भर्ती प्रक्रिया की अंतिम चयन सूची 18 फरवरी 2019 को जारी की गई थी. चयन सूची आने के बाद OBC वर्ग के अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी. दरअसल, उनका कहना था कि वे OBC महिला, OBC पूर्व सैनिक और OBC स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से आते हैं. लेक‍िन उनके नंबर जनरल महिला, जनरल पूर्व सैनिक और जनरल स्वतंत्रता सेनानी आश्रित के कट-ऑफ से ज्यादा थे. ऐसे नियम ये कहता है क‍ि अगर OBC का कैंडिडेट जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है तो उसका चयन अनारक्षित वर्ग में होना चाहिए. लेकिन भर्ती बोर्ड ने उन्हें सिर्फ OBC सब-कैटेगरी में गिनकर बाहर कर दिया. इसी तरह SC/ST के कुछ अभ्यर्थियों ने भी यही शिकायत की थी. सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके खिलाफ सरकार ने स्पेशल अपील दायर की थी.

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने अभ्यर्थियों की दलीलों को सही माना और राज्य सरकार की अपीलों को खारिज करते हुए अभ्यर्थियों के हक में फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने तीन बातें कहीं:

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  1. चयन का रास्ता साफ: सरकार की सभी अपीलें खारिज, सैकड़ों अभ्यर्थियों को अब नियुक्ति मिलेगी.
  2. आरक्षण की व्याख्या: हाईकोर्ट ने माना कि आरक्षित वर्ग का मेधावी अभ्यर्थी अगर अनारक्षित वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है तो उसे अनारक्षित में ही गिना जाना चाहिए, उसे अपनी ही कैटेगरी में रोकना गलत है.
  3. वित्तीय लाभ पर रोक: कोर्ट ने ये भी साफ किया कि इन सफल याचियों को सैलरी और अन्य वित्तीय लाभ नियुक्ति की तारीख से ही मिलेंगे. उन्हें 2019 से अब तक का एरियर या सीनियॉरिटी नहीं मिलेगी. यानी नोशनल बेनिफिट नहीं, एक्चुअल जॉइनिंग से लाभ म‍िलेगा.

इस फैसले के बाद UP पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) को जल्द ही अनुपालन करते हुए इन याचियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करनी होगी. यह फैसला भविष्य की UP Police Constable, SI और अन्य भर्तियों के लिए भी नजीर बनेगा.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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