इस महीने पूज्य गुरुदेवश्री राकेश जी साठ वर्ष के होंगे. मुंबई से शुरू हुआ उनका मिशन आज छह महाद्वीपों तक फैला है और इसी सप्ताह मुंबई में पर्युषण महापर्व का आरंभ हो रहा है. मंगलवार से मुंबई में जैन समाज का सबसे बड़ा पर्व आरंभ हो रहा है. पर्युषण महापर्व, आठ दिनों का वह पर्व जो संवत्सरी पर समाप्त होता है, इस वर्ष 8 से 15 सितंबर तक वर्ली के डोम, एसवीपी स्टेडियम में मनाया जाएगा. इन सभाओं के केंद्र में हैं पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी, श्रीमद् राजचंद्र मिशन धरमपुर के संस्थापक. संवत्सरी के दिन मांगी जाने वाली क्षमा केवल उन लोगों तक सीमित नहीं होती जिन्हें जानबूझकर दुख पहुंचाया गया हो. यह हर उस जीव के लिए होती है जिसे मन, वचन या कर्म से कष्ट पहुंचा हो, चाहे प्रत्यक्ष रूप से या परोक्ष रूप से, जानते हुए या अनजाने में. यह पहले मांगी जाती है, बिना यह प्रतीक्षा किए कि सामने वाला पहल करे.
आत्मसिद्धि, वह ग्रंथ जिससे यह सब शुरू हुआ
मिशन का दार्शनिक आधार श्रीमद् राजचंद्र की शिक्षाओं में है. उन्नीसवीं सदी के वे जैन कवि, दार्शनिक और सुधारक, जिन्हें महात्मा गांधी ने अपने आरंभिक जीवन का आध्यात्मिक मार्गदर्शक माना. दोनों की पहली भेंट 1891 में मुंबई में हुई थी, जब गांधी इंग्लैंड से लौटे थे. बाद में दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान भी दोनों के बीच वर्षों पत्राचार चलता रहा. श्रीमद् राजचंद्र की रचना आत्मसिद्धि शास्त्र पर पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी ने डॉक्टरेट स्तर का शोध किया. यही अध्ययन आगे चलकर उनके समूचे कार्य का आधार बना, फिर चाहे वह प्रवचन हों, साधना शिविर हों या उनके चारों ओर खड़ा हुआ संस्थागत ढांचा. मिशन की शुरुआत मुंबई से हुई. गुजरात के वलसाड ज़िले के धरमपुर में श्रीमद् राजचंद्र आश्रम की स्थापना 2001 में हुई और यही मिशन का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय है.
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अस्पताल, जो चालीस बिस्तरों से शुरू हुआ
मिशन की सेवा शाखा श्रीमद् राजचंद्र लव एंड केयर के अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी विकास, पर्यावरण और पशु कल्याण के क्षेत्र में पचास से अधिक परियोजनाएं संचालित होती हैं, जो अब कई देशों तक फैली हैं. इनमें सबसे बड़ी है श्रीमद् राजचंद्र हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर. इसकी शुरुआत 2004 में केवल चालीस बिस्तरों से हुई थी. 2013 तक क्षमता सौ बिस्तरों की हो गई और अस्पताल सालाना लगभग एक लाख रोगियों का उपचार करने लगा. 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां 250 बिस्तरों वाले नए बहु-विशेषज्ञता चैरिटेबल अस्पताल का उद्घाटन किया. अस्पताल एनएबीएच से मान्यता प्राप्त है और अधिकांश रोगियों को निःशुल्क या अत्यंत रियायती दरों पर उपचार देता है. मिशन ने 238 गांवों के क्षेत्र में पहला विज्ञान महाविद्यालय भी स्थापित किया, जो आदिवासी युवाओं के लिए उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाता है. लव एंड केयर को 2020 से संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद की विशेष परामर्शदात्री स्थिति (Special Consultative Status) प्राप्त है.
युवा, जो आमतौर पर दूर रहते हैं
मिशन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता उसका युवा वर्ग है. मिशन के अनुसार विश्वभर में उसके 77 युवा केंद्र और बच्चों के लिए 150 दिव्यस्पर्श केंद्र सक्रिय हैं. द्वेष पकड़े रखने में कोई परिश्रम नहीं लगता. उसे छोड़ने में उस आत्म-छवि का त्याग करना पड़ता है जो इस विश्वास पर टिकी होती है कि हमारे साथ अन्याय हुआ. यही कारण है कि क्षमा-याचना आठ दिनों के अंत में आती है, आरंभ में नहीं.
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साठवां वर्ष
पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी का जन्म 26 सितंबर 1966 को मुंबई में हुआ था. इस महीने उसी तारीख को वे साठ वर्ष के होंगे. इस अवसर पर 25 और 26 सितंबर को मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, बीकेसी में "अहो गुरुदेव, 60 Years of an Enlightened Existence" का आयोजन होगा. दो दिन चलने वाले इस समारोह में देश और विदेश से आए साधक सम्मिलित होंगे. 26 सितंबर की सुबह आत्मार्पित दीक्षा का आयोजन होगा, जिसमें विश्व के अलग-अलग हिस्सों से आए युवा साधक संन्यास का मार्ग अपनाएंगे. उसी संध्या को पूज्य गुरुदेवश्री के जीवन पर आधारित एक संगीत-नाट्य प्रस्तुति होगी, जिसे भक्तों ने स्वयं लिखा और मंचित किया है. यह सब तीन सप्ताह बाद की बात है. मंगलवार से वर्ली के स्टेडियम में हर सुबह और हर शाम सभा जुटेगी. और 15 सितंबर को वह सब एक वाक्य पर आकर समाप्त होगा-मिच्छामि दुक्कड़म्.
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