बाबा रामदेव ने शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताई, सांस्कृतिक और शैक्षिक बदलावों पर दिया जोर
Author: Priya Sharma
Feb 16, 2026 04:15 PM IST
हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बाबा रामदेव ने भारत में शिक्षा और सामाजिक प्राथमिकताओं की मौजूदा स्थिति पर बात की, और लोगों से शिक्षा और अपनी लाइफस्टाइल के प्रति अपने नजरिए पर फिर से सोचने की अपील की.
बाबा रामदेव ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई और इलाज पर लगभग ₹25 लाख करोड़ खर्च हो रहा है, लेकिन अगर लोग नशा, गलत आदतें और दिखावे वाली जिंदगी में उलझे रहेंगे तो देश आगे नहीं बढ़ पाएगा. उन्होंने कहा कि अंधविश्वास के नाम पर लापरवाही और ऐश-आराम बढ़ाना ठीक नहीं है. लोगों को समझदार और जिम्मेदार बनना चाहिए.
देश के भविष्य की बिगड़ती हालत पर रोशनी डालते हुए, उन्होंने कहा कि देश के बच्चों का भविष्य बिगड़ सकता है क्योंकि वे सोशल मीडिया पर बेकार वीडियो देखकर बहुत समय खराब कर रहे हैं. माता-पिता को इसके लिए यह करना चाहिए कि शुरुआत से ही अपने बच्चों को मोबाइल और बाकी ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रखें. ज्यादा स्क्रीन देखने से रोज के 2–3 घंटे ऐसे ही निकल जाते हैं. इसलिए परिवारों को ऐसी पढ़ाई अपनानी चाहिए जो बच्चों को अच्छे संस्कार, संस्कृति और सही परवरिश दे.
उन्होंने कहा कि विकसित देश अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. भारत को भी अपने सरकारी स्कूलों की शिक्षा को इतना अच्छा बनाना चाहिए कि वह दुनिया के स्तर की हो. उन्होंने यह भी कहा कि भारत को सिर्फ बाहर के सामान खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद नए उत्पाद बनाने और नई खोज करने वाला देश बनना चाहिए.
अपनी बात को खत्म करते हुए आखिर में बाबा रामदेव ने कहा कि हमें अपनी पढ़ाई, रहन-सहन और सोच बदलनी होगी. नई टेक्नोलॉजी और पुरानी परंपराओं को साथ लेकर चलेंगे, तभी देश सच में आत्मनिर्भर बन पाएगा.