राजधानी दिल्ली के कृषि भवन परिसर में मौजूद करीब 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. केंद्र सरकार की ओर से कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्निर्माण के लिए नया टेंडर जारी किया गया है. जिसके बाद ये आशंका जताई जा रही है कि इस ऐतिहासिक मस्जिद को हटाया जा सकता है. इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड ने चिंता जाहिर की है.
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क्यों परेशान है वक्फ बोर्ड?
केंद्र सरकार की सेंट्रल विस्टा और कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) परियोजना के तहत कई पुराने सरकारी भवनों को तोड़कर नई इमारतें बनाई जा रही हैं. इसी योजना के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन का पुनर्निर्माण प्रस्तावित है. इसके लिए CPWD की ओर से हाल ही में नया टेंडर जारी किया गया है. वक्फ बोर्ड का कहना है कि इस टेंडर से जुड़े नए नक्शों में कदीमी मस्जिद को साफ तौर पर नहीं दिखाया गया है, जिससे उसके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं. बोर्ड के मुताबिक, ये मस्जिद कृषि भवन से भी पहले की है और यहां लंबे समय से नियमित रूप से नमाज अदा की जाती रही है.
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2021 में बोर्ड ने कोर्ट में दायर की थी याचिका
वक्फ बोर्ड ने बताया कि साल 2021 में इस मस्जिद की सुरक्षा को लेकर अदालत का रुख किया गया था. उस समय सरकार की ओर से ये भरोसा दिलाया गया था कि निर्माण कार्य के दौरान मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन ये भी कहा था कि अगर भविष्य में मस्जिद को खतरा होता है तो वक्फ बोर्ड दोबारा अदालत जा सकता है. मस्जिद के इमाम और स्थानीय लोग भी इसके हटाए जाने की आशंका से चिंतित हैं. उनका कहना है कि ये सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़ा स्थान है. फिलहाल सरकार की ओर से मस्जिद को हटाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन नए टेंडर के बाद विवाद और गहरा सकता है.
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