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क्या भारत को अमेरिका से तेल खरीदने के लिए मजबूर किया जाएगा? सरकार ने साफ कर दिया रुख

India Us Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बातचीत के बीच ये सवाल उठा कि क्या भारत को अमेरिका से कच्चा तेल खरीदने के लिए मजबूर किया जाएगा. इस पर केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि भारत पर किसी भी देश से तेल खरीदने का कोई दबाव नहीं है और सभी फैसले देश के हित, ऊर्जा सुरक्षा और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे.

Credit: Social Media

भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार बातचीत के बीच ये सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या भारत को अब अमेरिका से कच्चा तेल खरीदना अनिवार्य होगा. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने साफ और सटीक जवाब दिया है. सरकार ने कहा है कि भारत पर किसी भी देश से तेल खरीदने का कोई दबाव नहीं है और फैसले पूरी तरह देश के हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों से तेल और गैस खरीदता है. अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी खरीदना भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन ये फैसला बाजार की स्थिति और कंपनियों की जरूरतों पर निर्भर करता है. किसी भी व्यापार समझौते में ये शर्त नहीं रखी गई है कि भारत को अमेरिका से ही तेल खरीदना होगा.

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'ये डील भारत की आजादी को सीमित नहीं करेगी'

सरकार ने ये भी साफ किया कि भारत-अमेरिका के बीच जो व्यापार समझौता हो रहा है, उसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और आर्थिक सहयोग बढ़ाना है. ये डील भारत की आजादी को सीमित नहीं करती. भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए हमेशा सस्ते और भरोसेमंद विकल्पों को अहमियत देगा. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आने वाले सालों में भारत अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर तक का व्यापार कर सकता है. इसमें ऊर्जा उत्पादों के अलावा विमान, मशीनें और तकनीकी सामान भी शामिल होंगे.

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'भारत किसी दबाव में नहीं आएगा'

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भविष्य में व्यापार इससे ज्यादा भी हो सकता है. रूस से तेल खरीद को लेकर उठ रहे सवालों पर पीयूष गोयल ने कहा कि ये विषय विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, जिस पर विदेश मंत्रालय सही समय पर जवाब देगा. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखता है. सरकार ने दो टूक कहा है कि भारत किसी दबाव में नहीं आएगा और तेल खरीद से जुड़ा हर फैसला देश की जरूरत और फायदे को देखकर ही किया जाएगा.

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