विदेशों में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को वापस भेजने के मामलों में पिछले तीन वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. लोकसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खासकर अमेरिका से निर्वासित होने वाले भारतीयों की संख्या में तेज उछाल आया है. साल 2023 में जहां अमेरिका से 617 भारतीय वापस भेजे गए थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,414 तक पहुंच गया है. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि हालांकि कई देश अवैध प्रवासियों का पूरा डेटा साझा नहीं करते, लेकिन उपलब्ध जानकारी से साफ है कि अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ विदेशी जमीन पर कार्रवाई अब काफी सख्त हो गई है.
मिडल ईस्ट और यूएई क्यों लौट रहे हैं भारतीय?
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों से भी भारतीयों की वापसी का सिलसिला जारी है. सऊदी अरब से 2023 में रिकॉर्ड 37 हजार भारतीयों को निकाला गया था, जो बाद के वर्षों में कम हुआ है. दूसरी ओर यूएई से होने वाले निर्वासन में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. साल 2023 में यूएई से 3,500 भारतीय वापस आए थे, लेकिन 2025 में यह संख्या बढ़कर 9,500 के करीब पहुंच गई है. आंकड़े बताते हैं कि बिना वैध वीजा के जाना या वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी वहां रुके रहना निर्वासन की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आ रही है.
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विदेश क्यों हो रही है भारतीयों की जबरन वापसी?
भारतीय नागरिकों के निर्वासन के पीछे कई कानूनी कारण जिम्मेदार हैं. सरकार के अनुसार, इनमें बिना वैध वीजा के विदेश जाना, वर्क परमिट के बिना काम करना और श्रम कानूनों का उल्लंघन करना शामिल है. कई बार भारतीय नागरिक अपने नियोक्ताओं को छोड़कर भाग जाते हैं या अनजाने में वहां के स्थानीय कानूनी पचड़ों में फंस जाते हैं. बढ़ते निर्वासन के ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि बेहतर भविष्य की तलाश में अवैध रास्तों का चुनाव करना अब भी एक बड़ी और गंभीर चुनौती बना हुआ है, जिस पर सरकार अब सख्त निगरानी रख रही है.
हथकड़ी और धार्मिक संवेदनाओं पर सरकार सख्त
भारत सरकार ने निर्वासन के दौरान भारतीय नागरिकों के साथ होने वाले व्यवहार का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है. विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने महिलाओं और बच्चों को हथकड़ी लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. साथ ही, भारतीयों की धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं, जैसे पगड़ी पहनना और भोजन की विशेष जरूरतों का ध्यान रखने की मांग भी की गई है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि 5 फरवरी 2025 के बाद से किसी दुर्व्यवहार की शिकायत नहीं मिली है, लेकिन भारतीय नागरिकों का सम्मान और सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी.
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