Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी की चीफ अखिलेश यादव 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाली ‘इंडिया अलायंस’ की मीटिंग में शामिल नहीं होंगे. लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यादव ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उस दिन वो किसी दूसरे काम में बिजी रहेंगे. उन्होंने बताया कि इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी जानकारी दे दी गई है. उनकी जगह समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता बैठक में हिस्सा लेंगे.
SIR और चुनाव आयोग पर होगी चर्चा
INDIA गठबंधन की मीटिंग में चुनाव आयोग के काम करने के तरीके, वोटर्स लिस्ट के SIR और इससे जुड़े दूसरे मुद्दों पर विपक्षी दल चर्चा कर सकते हैं. बैठक के दौरान चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर भी विपक्षी दल अपनी आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं. अखिलेश यादव ने सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच समय-समय पर सामने आने वाले बयानों को लेकर कहा कि ये गठबंधन की रणनीति का हिस्सा है. उन्होंने इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा पर भी कई आरोप लगाए.
वोटर्स को मतदान से रोकने का आरोप
अखिलेश यादव ने दावा किया कि कुछ ऐसे लोग जिन्होंने 2019 में मतदान किया था, उन्हें 2022 में वोट डालने का मौका नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनावों के दौरान कुछ जगहों पर रास्ते बंद किए गए और सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों के जरिए मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया.
SIR को लेकर यादव ने यूपी में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया. इस तरह के फॉर्म का इस्तेमाल वोटर्स लिस्ट से किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करने में किया जाता है. यादव ने आरोप लगाया कि बड़ी तादाद में ऐसे एप्लिकेशंस भरवाए गए और लखनऊ में एक शख्स की तरफ से 100 से ज्यादा फॉर्म जमा किए जाने का दावा किया.
चुनाव आयोग पर सवाल
सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग से अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने और निष्पक्ष तरीके से काम करने की अपील की. उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की ओर से कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन उन पर सही तरीके से कार्रवाई नहीं हुई. वहीं SIR को लेकर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श में अलग-अलग विचार और कमेंट्स सामने आना सामान्य प्रक्रिया है.
गोरखपुर के जलभराव पर भी निशाना
अखिलेश यादव ने गोरखपुर में जलभराव को लेकर राज्य सरकार के काम करने के तरीके पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि शहर में नाव की जगह मेट्रो सिस्टम होना चाहिए था. उनका ये भी कहना है कि प्रयागराज और वाराणसी के विकास पर जितना खर्च किया गया, उस हिसाब से रिजल्ट नहीं मिला है.