जिस तरह से राजनीति में पहले से ही दर्जनों नाम किसी भी पद के लिए दौड़ में शामिल हो जाते है, ठीक उसी तरह से सेना में भी नए सीडीएस यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के लिए कई जनरल के नाम रेस में शामिल हो गए हैं. और इसी कमोबेश को देखते हुए यह सवाल उठना शुरू हो गया है कि क्या सीडीएस की सीट सेना की है या फिर इसमें भी राजनीति की चाशनी पिरो दी गई है.
अगर देखा जाए तो सीडीएस सेना की ड्रेस में रहते है, सेना के सभी फैसलों में सेना के सचिव बनकर कई फैसलों पर मुहर भी लगाते है. यानी इस पद को मिलिट्री और राजनीतिक दोनों ही माना जा सकता है.
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ऐसी क्या वजह है कि लगातार दूसरी बार आर्मी से ही सीडीएस बनाया गया है, क्या तीसरा सीडीएस एयरफोर्स या नौसेना से बनेगा? या फिर आर्मी से ही किसी को बनाया जाएगा.
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लेफ्टिनेंट जनरल विनोद खंडारे का कहना है कि भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी पर हमेशा खतरा बरकरार रहता है, इसके अलावा एलओसी और एलएसी पर लगातार भारतीय सेना को दुश्मन देश से चुनौती मिलती रहती है. दूसरा आर्मी से सीडीएस चुने जाने का कारण यह है कि भारत की तीनों सेना में थल सेना सबसे बड़ी है और ग्राउंड यानी जमीन की लड़ाई में सबसे बड़ा अनुभव थल सेना का ही है.
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जिस तरह से मुख्यमंत्री को लेकर कई नाम चर्चा में आते है तो ठीक इसी तरह से सीडीएस के लिए भी कई नाम रेस में शामिल हो गए है.
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रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल से लेकर रिटायर होने वाले नेवी चीफ दिनेश त्रिपाठी का भी नाम चर्चा में है वो इसलिए भी क्योंकि अगले महीने ये रिटायर्ड होने वाले हैं.
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इन सब के बीच यह भी कहा जा रहा है कि वर्तमान सीडीएस का कार्यकाल दोबारा बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने साल 2025 के सितंबर में सीडीएस के कार्यकाल को 30 मई 2026 तक के लिए बढ़ा दिया था. थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जून 2026 में रिटायर्ड होने वाले है इसलिए इनके भी नाम की चर्चा हो रही है.
क्या है सीडीएस की चयन प्रक्रिया
सीडीएस का चयन प्रधानमंत्री की नेतृत्व में कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमिटी करती है. अपॉइंटमेंट्स कमिटी को डिफेंस मिनिस्ट्री नाम का प्रस्ताव भेजती है. बता दें, सीडीएस के लिए सीनियरिटी कोई मायने नहीं रखता है. यहां यह मायने रखता है कि तीनों सेना की बारीकी से जानकारी किसके पास है, जो वर्तमान और भविष्य के युद्ध के लिए नीति और रणनीति बना सके. साथ ही सरकार के साथ मिलकर डिफेंस की नई प्लाइनिंग तैयार कर सके.