Who Is Judge Shubham Verma: सुल्तानपुर जिला अदालत ने 26 अक्तूबर 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक आपराधिक मानहानि केस में बरी कर दिया. ये मामला 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ उनकी टिप्पणियों से जुड़ा था. इस मामले की सुनवाई एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (स्पेशल मजिस्ट्रेट) शुभम वर्मा ने की, जो यूपी के सुल्तानपुर में विशेष MP-MLA अदालत के पीठासीन अधिकारी हैं. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गांधी का बयान मानहानि के दायरे में नहीं आता है.
जज शुभम वर्मा कौन हैं?
शुभम वर्मा उत्तर प्रदेश के एक न्यायिक अधिकारी हैं, जो अएडिशनल सिविल जज (सीनियर डिविजन) और एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के तौर पर कार्यरत हैं. उन्होंने राज्य के कई जिलों में न्यायिक पदों पर काम किया है, जिनमें बस्ती, मऊ, गाजियाबाद और सुल्तानपुर शामिल हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक शुभम 27 फरवरी 2015 को न्यायिक सेवा में शामिल हुए थ्. 7 जनवरी 2019 को उन्हें पदोन्नत करके सिविल जज (सीनियर डिवीजन) बनाया गया और क्लास-1 ऑफिसर का दर्जा दिया गया. मूल रूप से यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले शुभम, रवींद्र वर्मा के बेटे हैं. उनकी रिटायरमेंट की तारीख 31 जुलाई 2048 है.
जज शुभम वर्मा की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन
LL.M. (मास्टर ऑफ लॉ): 2021
LL.B. (बैचलर ऑफ लॉ): 2010
B.A. (बैचलर ऑफ आर्ट्स): 2007
राहुल गांधी का मानहानि मामला क्या है?
ये आपराधिक मानहानि की शिकायत 4 अगस्त 2018 को स्थानीय भाजपा नेता और सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने दर्ज कराई थी. शिकायत में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 का हवाला दिया गया था, जो मानहानि और उससे जुड़ी सजा से संबंधित हैं.
ये मामला 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान बेंगलुरु में दिए गए राहुल गांधी के एक भाषण से जुड़ा है. अपने भाषण के दौरान राहुल ने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले के संदर्भ में अमित शाह का जिक्र किया था. एक विशेष सीबीआई अदालत ने 2014 में उस मामले में शाह को आरोपमुक्त कर दिया था.
राहुल को 27 नवंबर 2023 को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया गया था. इसके बाद वो अदालत में पेश हुए और जमानत ले ली. कार्यवाही के दौरान, गांधी ने आरोपों से इनकार किया और तर्क दिया कि ये शिकायत राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और इसका मकसद उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है. आखिरकार सुल्तानपुर अदालत ने राहुल को बरी कर दिया, जिससे निचली अदालत के स्तर पर आपराधिक मानहानि की कार्यवाही खत्म हो गई.