केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में नौ अप्रैल को हुए चुनाव में AINRC के नेतृत्व वाले NDA की शानदार जीत के बाद एन. रंगासामी पांचवीं बार मुख्यमंत्री का पद संभालने के लिए तैयार हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को एन. रंगासामी को पुडुचेरी का मुख्यमंत्री नियुक्त किया. गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, ‘राष्ट्रपति को एन. रंगासामी को पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त करके प्रसन्नता हुई, यह नियुक्ति उनके शपथ ग्रहण की तारीख से प्रभावी होगी.’ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अधिसूचना के बाद उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने रंगासामी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया.
13 मई को लेंगे शपथ
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रंगासामी 13 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. केंद्र शासित प्रदेश में नौ अप्रैल को हुए चुनाव में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की शानदार जीत के बाद रंगासामी 5वीं बार मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के लिए तैयार हैं.
कौन हैं एन. रंगासामी?
एन. रंगासामी दक्षिण भारत की सबसे जानी-मानी राजनीतिक हस्तियों में से एक हैं. वे पुडुचेरी के मुख्यमंत्री हैं और ‘ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस’ (AINRC) के संस्थापक हैं. उनकी कहानी को जो बात खास बनाती है, वह यह है कि उन्होंने अपनी खुद की क्षेत्रीय पार्टी बिल्कुल शुरू से खड़ी की और मुख्यमंत्री बने.
अगर आप भारतीय राजनीति, खासकर केंद्र शासित प्रदेशों की राजनीति पर नजर रखते हैं, तो एन. रंगासामी नाम आपको बार-बार सुनने को मिलेगा.
रंगासामी का शुरुआती जीवन
एन. रंगासामी का जन्म 4 अगस्त 1950 को पुडुचेरी में हुआ था. उनका पूरा नाम नटेसन कृष्णसामी गौंडर रंगासामी है, और उनके माता-पिता नटेसन कृष्णसामी और पांचाली हैं.
उन्होंने पुडुचेरी के छोटे से केंद्र शासित प्रदेश में एक राजनेता के तौर पर धीरे-धीरे तरक्की की. उनका परिवार एक साधारण पृष्ठभूमि से था और उनकी जड़ें स्थानीय समुदाय से जुड़ी थीं; इसी परवरिश ने जमीनी स्तर के शासन और जन कल्याण के प्रति उनके दृष्टिकोण को आकार दिया.
पुडुचेरी में सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बाद भी, वे बहुत ही सादा और विनम्र जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं. वे अविवाहित हैं और अपनी सादगी भरी जीवनशैली के लिए लोगों के बीच चर्चित हैं.
एन. रंगासामी की पढ़ाई कहां से हुई?
एन. रंगासामी का शैक्षिक सफर सीधा-सादा लेकिन उद्देश्यपूर्ण रहा है. उन्होंने पुडुचेरी के टैगोर आर्ट्स कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की, और बाद में 1977 में पुडुचेरी के डॉ. अंबेडकर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून में स्नातक (LL.B) की डिग्री प्राप्त की.
कानून की डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने एक वकील के तौर पर काम किया. तमिलनाडु के दिवंगत नेता के. कामराज से प्रेरित होकर, रंगासामी ने वकालत छोड़ दी और पूरी तरह से राजनीति में आ गए. इस फैसले ने न सिर्फ उनकी जिंदगी बदल दी, बल्कि पुडुचेरी के राजनीतिक परिदृश्य को भी हमेशा के लिए बदल दिया.
एन. रंगासामी का राजनीतिक सफर
1990 में, रंगासामी ने चुनावी राजनीति में कदम रखा और थट्टनचावडी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा. नतीजा उनके पक्ष में नहीं रहा, जिससे उन्हें शुरुआती दौर में ही एक झटका लगा. एक साल बाद, वे उसी निर्वाचन क्षेत्र में फिर से उतरे और 1991 में वह सीट जीतकर पुडुचेरी विधानसभा में प्रवेश किया.
1991 की उस जीत ने उनके एक लंबे और शानदार राजनीतिक सफर के दरवाजे खोल दिए. 1991 की जीत के बाद, उन्होंने कृषि, सहकारिता, पर्यटन, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली. इन सभी भूमिकाओं ने उन्हें शासन के अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव दिया, जो मुख्यमंत्री बनने पर उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ.
जब पहली बार बने थे मुख्यमंत्री
2001 में, रंगासामी कांग्रेस पार्टी के तहत पहली बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री बने. 2006 के चुनावों के बाद वे फिर से सत्ता में लौटे और लगातार दो कार्यकाल पूरे किए. इस दौरान, उनकी सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं.
2001 से शुरू हुए मुख्यमंत्री के अपने लंबे कार्यकाल के दौरान, उन्होंने इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश में विकास संबंधी कई सुधार लागू किए. पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में एन. रंगासामी के 8 साल के कार्यकाल को पुडुचेरी के इतिहास में ‘स्वर्ण युग’ माना जाता है.
क्यों छोड़ी कांग्रेस?
सबसे मजबूत राजनीतिक करियर को भी तूफानों का सामना करना पड़ता है. कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही आपसी कलह के बाद, रंगासामी ने 28 अगस्त 2008 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, और 4 सितंबर 2008 को वैथिलिंगम ने उनकी जगह ली.
रंगासामी के लिए यह एक बहुत ही तकलीफदेह पल था. यह इस्तीफा अगस्त 2008 में रंगासामी को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने से जुड़ी गहरी शिकायतों की वजह से हुआ, जब कांग्रेस हाईकमान ने कई कैबिनेट साथियों की बगावत के बीच उन्हें पद छोड़ने का आदेश दिया था. रंगासामी ने हालात को चुपचाप स्वीकार करने के बजाय, अपने ही अंदाज में इसका डटकर मुकाबला करने का फैसला किया.
AINRC की स्थापना
21 जनवरी 2011 को, उन्होंने विधानसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस पार्टी छोड़ दी. 2011 के विधानसभा चुनावों से पहले, 7 फरवरी 2011 को, रंगासामी ने एक नई पार्टी—ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC)—के गठन की घोषणा की.
इसके बाद जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था. अपनी पार्टी बनाने के महज तीन महीने के भीतर ही मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है.
अप्रैल 2011 में हुए विधानसभा चुनावों में, AINRC ने AIADMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और जिन 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से 15 पर जीत हासिल की. रंगासामी ने कादिरकामम निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की और 16 मई 2011 को तीसरी बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
मुख्यमंत्री के तौर पर तीसरा और चौथा कार्यकाल
2016 के विधानसभा चुनावों में, AINRC ने सभी 30 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा. हालांकि रंगासामी इंदिरा नगर निर्वाचन क्षेत्र से जीत गए, लेकिन पार्टी को केवल आठ सीटें ही मिलीं. इसलिए, रंगासामी ने 6 जून 2016 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
रंगासामी ने विपक्ष में रहते हुए उन पांच सालों का इस्तेमाल अपनी पार्टी को फिर से संगठित करने और रणनीति बनाने में किया. जब अगला चुनाव आया, तो इसके नतीजे साफ नजर आए.
AINRC नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) का हिस्सा बन गई और 2021 के चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और AIADMK के साथ गठबंधन कर लिया. NDA ने 16 सीटें जीतीं, जिसमें से AINRC ने उन 16 सीटों में से 10 सीटें जीतीं जिन पर उसने चुनाव लड़ा था. BJP और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन से, रंगासामी ने 7 मई 2021 को चौथी बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.
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