कौन हैं भ्रष्टाचार विरोधी Icon हजारे? सैनिक किसन बापट से कैसे बने सरकारों को झुकाने वाले 'अन्ना'

Who is Anna Hazare: अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर जनलोकपाल बिल के लिए भारत आंदोलन छेड़कर केंद्र सरकार करो झुकाने वाले अन्ना हजारे ने फिर भूख हड़ताल करने और इस बार आखिरी सांस तक आमरण अनशन करने की चेतावनी दी है. इसके लिए उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को लेटर लिखा है.

anna hazare

अन्ना हजारे एक सैनिक से भ्रष्टचार विरोध सामाजिक कार्यकर्ता बने हैं.

Anna Hazare Profile: देश में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ जन-जन में विरोध की अलख जगाने वाले अन्ना हजारे एक बार फिर सुर्खियों में हैं. क्योंकि उन्होंने एक बार फिर रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान किया है, जो उनकी आखिरी अनशन होगा, यानी वे इस बार आखिरी सांस तक भूख हड़ताल करेंगे. महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून लागू कराने के लिए उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेटर लिखकर अनशन की चेतावनी दी है.

विज्ञापन

सैनिक से बने सामाजिक कार्यकर्ता

गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित होकर सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले अन्ना हजारे एक सैनिक से भ्रष्टाचार विरोधी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता बने, जिन्होंने उपवास रखकर अहिंसक तरीके से केंद्र और राज्य सरकारों को झुकाया और अपनी मांगें मनवाईं. अन्ना हजारे ने जिंदगी के 15 साल देशसेवा में लगाए और सेना से रिटायर होने के बाद समाज सेवा में लग गए. वे उन नेताओं में शामिल हैं, जो सिर पर गांधीजी की टोपी और खादी के कपड़े पहनते हैं.

विज्ञापन

पारिवारिक जीवन और शिक्षा-पढ़ाई

15 जून 1938 को महाराष्ट्र के भिंगारी गांव में जन्मे अन्ना हजारे का असली नाम किसन बापट बाबूराव हजारे है. उनके पिता बाबूराव हजारे मजदूरी करते थे और उनकी मां का नाम लक्ष्मीबाई हजारे थे. 6 भाइयों में से एक अन्ना हजार आर्थिक तंग के कारण 7वीं तक ही पढ़ पाए. गरीबी की मार झेलते हुए अन्ना हजारे का परिवार मुंबई आ गया, जहां उन्हें परिवार के गुजर बसर के लिए एक फूल वाले के यहां नौकरी करनी पड़ी, जहां उन्हें 40 रुपये महीना पगार मिलती थी.

सेना में भर्ती होकर सिपाही बने अन्ना

मुंबई में गुंडों से गरीबों की रक्षा करने वाले गुट का हिस्सा बनकर समाज सेवा करने वाले अन्ना हजार ने 1962 में सेना जॉइन की थी. भारत-चीन युद्ध के बाद केंद्र सरकार ने युवाओं से आर्मी जॉइन करने की अपील की तो वे सेना की मराठा रेजीमेंट में बतौर ड्राइवर भर्ती हुए. 1965 के भारत-पाक युद्ध में उन्हें सरहद पर जाने का मौका मिला और खेमकरण में तैनात हुए, जहां 12 नवंबर 1965 को पाकिस्तान के हवाई हमले में वे इकलौते जिंदा बचे सिपाही थे, बाकी मारे गए थे.

विज्ञापन

रालेगण सिद्धि गांव की काया पलटी

सेना से रिटायर होने के बाद वे अहमदनगर जिले के गांव रालेगण सिद्धि में रहने लगे, जहां के किसानों के लिए उन्होंने काम किया. उन्होंने सूखाग्रस्त और गरीबी-अपराध से ग्रस्त गांव को आत्मनिर्भर बनाया. गांव की बिजली-पानी की कमी दूर करने के लिए किसानों के साथ मिलकर तालाब बनाए, जिनमें बारिश का पानी स्टॉक करके सिंचाई के साधन मजबूत किए. पेड़ लगाकर गांव को हरा-भरा बनाया. सोलर एनर्जी और गोबर गैस से बिजली की समस्या दूर करने में मदद की.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ