प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय इजरायल दौरे के दौरान वहां की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित कर एक नया इतिहास रच दिया है. वे इजरायली संसद में भाषण देने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं. पीएम मोदी का यह दूसरा इजरायल दौरा है, इससे पहले वे साल 2017 में वहां गए थे. जैसे ही प्रधानमंत्री संसद भवन पहुंचे, वहां मौजूद सांसदों ने खड़े होकर ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए और मेज थपथपाकर उनका जोरदार स्वागत किया. उन्होंने अपने संबोधन में 1.4 अरब भारतीयों की ओर से मित्रता, सम्मान और मजबूत साझेदारी का संदेश दुनिया के सामने रखा.
आतंकवाद के खिलाफ अडिग और सख्त रुख
पीएम मोदी ने इजरायली सांसदों के बीच आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों की हत्या और आतंक को किसी भी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता. प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर 2023 को हुए बर्बर हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारत इस दुख की घड़ी में पूरी मजबूती के साथ इजरायल के साथ खड़ा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया में कहीं भी होने वाला आतंकवाद वैश्विक शांति के लिए खतरा है और इसका मुकाबला करने के लिए पूरी दुनिया को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी.
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मिडिल ईस्ट में शांति और अब्राहम अकॉर्ड का महत्व
अपने भाषण में पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट की बदलती स्थिति और ‘अब्राहम अकॉर्ड’ का विशेष जिक्र किया. सितंबर 2020 में अमेरिका की पहल पर इजरायल, बहरीन और यूएई के बीच यह ऐतिहासिक समझौता हुआ था, जिसे बाद में मोरक्को और सूडान ने भी समर्थन दिया. प्रधानमंत्री ने इसे अशांत क्षेत्र के लिए उम्मीद की एक नई किरण बताया. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अरब देशों और इजरायल के बीच शांति, आर्थिक सहयोग और धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देना है. भारत ने शुरू से ही इस पहल का स्वागत किया है क्योंकि यह क्षेत्र की स्थिरता के साथ भारत के रणनीतिक हितों के लिए भी फायदेमंद है.
गाजा में शांति की पहल और भविष्य का विजन
प्रधानमंत्री ने गाजा के हालातों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत वहां शांति बहाली की हर कोशिश का समर्थन करता है. उन्होंने स्वीकार किया कि शांति का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन संवाद और स्थिरता के जरिए इसे हासिल करना जरूरी है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश आने वाले समय में रक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे क्षेत्रों में अपने रिश्तों को और भी गहराई देंगे. उनका यह संबोधन न केवल दोनों देशों की दोस्ती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का भी प्रतीक है.
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