What is Reverse Gear of Monsoon: देश में सूखे जैसे हालात झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है. लंबे समय के इंतजार के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय हो रहा है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 20 से 30 जुलाई के दौरान उत्तर, पूर्वी और मध्य भारत में झमाझम बारिश होने के पूरे आसार हैं. इसे मानसून का ‘रिवर्स गियर’ कहते हैं। यह वास्तव में उत्तर-पूर्वी मानसून या ‘लौटता हुआ मानसून’ कहलाता है. जब दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे भारत में बारिश करने के बाद सितंबर-अक्टूबर में वापस लौटने लगता है तो हवाओं की दिशा 180 डिग्री उलट जाती है. उत्तर-पूर्वी दिशा से चलने वाली ये शुष्क हवाएं बंगाल की खाड़ी से नमी उठाकर तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और केरल में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भारी बारिश कराती हैं.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोई असामान्य घटना नहीं बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप के प्राकृतिक वायुमंडलीय चक्र का एक अनिवार्य हिस्सा है. जहां भारत के 80% हिस्सों में जून से सितंबर के दौरान बारिश होती है, वहीं दक्षिण-पूर्वी तटों के लिए यह ‘रिवर्स मानसून’ ही मुख्य जलस्रोत बनता है.
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क्यों सक्रिय हो रहा है मानसून?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय दो बड़े मौसमी सिस्टम एक साथ काम कर रहे हैं. पहला, भूमध्य रेखा के पास ‘BSISO’ (बोरियल समर इंट्रासीजनल ऑसीलेशन) पॉजिटिव फेज में आ गया है. दूसरा, बंगाल की खाड़ी में ‘रॉस्बी वेव्स’ के प्रभाव से लो-प्रेशर सिस्टम (LPS) एक्टिव हो रहा है. इन दोनों के मिलन से हवा में नमी तेजी से बढ़ रही है, जिससे मानसून की रफ्तार दोगुनी हो गई है.
इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो जाएगा. रविवार और सोमवार तक इसका असर दिल्ली-NCR, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान तक देखने को मिलेगा.
19-25 जुलाई के दौरान अनुमानित बारिश
- उत्तराखंड: 300-500 मिमी
- उत्तर प्रदेश: 200-350 मिमी
- हिमाचल प्रदेश और जम्मू: 150-300 मिमी
- पंजाब और चंडीगढ़: 100-200 मिमी
- हरियाणा और दिल्ली NCR: 100-150 मिमी
- पूर्वी राजस्थान: 75-200 मिमी
पहाड़ों पर खतरा, मैदानों में अलर्ट
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों और किसानों के लिए यह बारिश बेहद राहत भरी साबित होगी. हालांकि, पहाड़ी इलाकों में स्थिति चिंताजनक हो सकती है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भूस्खलन , बादल फटने और अचानक बाढ़ आने का खतरा है. पर्यटकों और यात्रियों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है.
उत्तर और दक्षिण भारत में मौसम का बंटवारा
मौसम मॉडल्स (ECMWF) के अनुसार, 20 से 27 जुलाई के बीच उत्तर और पूर्वी भारत में तो अच्छी बारिश होगी, लेकिन दक्षिण और पश्चिमी भारत में मानसून कमजोर रहेगा. गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में औसत से कम बारिश होने की आशंका है, जिससे वहां सूखे का असर बढ़ सकता है.
किसानों के लिए क्या हैं संकेत?
जून और जुलाई की शुरुआत में बारिश न होने से खरीफ फसलों को काफी नुकसान पहुंच रहा था. इस बारिश से किसानों को संजीवनी मिलेगी, लेकिन अचानक तेज बारिश से निचले खेतों में जलभराव की समस्या भी खड़ी हो सकती है. किसानों को खेतों से पानी निकासी का प्रबंध रखने की सलाह दी गई है.
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