भारतीय वायुसेना से मिग-21 लड़ाकू विमान एक साल पहले रिटायर हो गए थे. चंडीगढ़ एयरबेस ने इन विमानों ने आखिरी उड़ान भरी थी, लेकिन इन विमानों को लेकर आज भी एक सवाल उठता है कि रिटायर होने के बाद लड़ाकू विमानों का क्या होता है? क्या उन्हें स्क्रैप बना दिया जाता है? जबकि मिग-21 करीब 60 साल तक दुश्मनों के खिलाफ भारतीय वायुसेना का सबसे मजबूत और भरोसेमंद हथियार रहे, लेकिन भारतीय वायु सेना ने साल 2015 से 2022 के बीच हर साल मिग-21 यूनिट को एक-एक करके सेवा से बाहर किया और पिछले साल लास्ट यूनिट मिग-21 भी रिटायर हो गई थी.
बतौर विरासत संभालकर रखे जाते 2 विमान
भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर पार्थ विक्रम ने नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री ‘द लास्ट सैल्यूट’ में मिग-21 के बारे कहा कि बेशक इन पर उम्र का असर पड़ता है, लेकिन इन विमानों ने अपनी काबिलियत खुद साबित की और भविष्य में अगर जरूरत पड़ी तो बुजुर्ग होने के बावजूद रण में उतरकर अपनी काबिलियत साबित करेंगे. वहीं रिटायरमेंट के बाद मिग-21 विमानों के भविष्य, स्थिति, हालत और इस्तेमाल के लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक या 2 विमान विरासत के रूप में संभालकर रखे जाते हैं. युद्ध के लिए नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों को याद दिलाने के लिए संरक्षित किए जाते हैं.
फ्लाई पास्ट में इस्तेमाल होते रिटायर्ड विमान
पार्थ विक्रम ने बताया कि भारतीय वायु सेना ने टाइगर मॉथ, हार्वर्ड और डकोटा जैसे पुराने लड़ाकू विमान भी संभालकर रखे हुए हैं और उसी तरह विमानों का रखरखाव और संचालन किया जाता है, जैसे सर्विस में रहते हुए किया जाता था, क्योंकि फ्लाई पास्ट के दौरान उनका प्रदर्शन किया जाता है. वहीं मिग-21 लड़ाकू विमान से जुड़ी चीजें वॉर म्यूजियम में संभालकर रखी जाती हैं, जिनकी अकसर एग्जीबिशन भी लगती है. देशभर में विशेष जगहों पर इन्हें पब्लिकली डिस्प्ले भी किया जाता है, जैसे मुंबई के बांद्रा बैंडस्टैंड में भारतीय नौसेना का सी हैरियर विमान रखा है. जैसे ट्रेनों के पुराने इंजन डिस्पले किए जाते हैं.
एक मिग-21 विमान प्राइवेट कंपनी को बेचा
भारतीय वायुसेना रिटायर हो चुके विमानों केा कलपुर्जों को भी संभालती है, लेकिन उन्हें जिन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, बाकी को नष्ट कर दिया जाता है. मिग-21 की बात करें तो अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मिग-21 विमानों का क्या किया जाएगा या इन्हें स्क्रैप किया जाएगा या नहीं? एक मिग-21 विमान को प्राइवेट कंपनी को बेचा गया था. यह विमान हरियाणा में रोहतक-दिल्ली स्टेट हाईवे पर महाराजा ढाबा के बाहर 2 ट्रैक्टरों के साथ खड़ा है. अमेरिका में रिटायर्ड विमान एरिजोना में डेविस-मोनथन एयरबेस पर बने बोनीयार्ड में पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें स्टोर और संरक्षित किया जाता है.
872 में से 482 मिग-21 हादसों में तबाह हुए
बता दें कि भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में मिग-21 लड़ाकू विमान की हिस्सेदारी 60% थी. इन विमानों को IAF की रीढ़ की हड्डी कहा जाता था. लेकिन मिग-21 का नुकसान भी उठाना पड़ा. तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने एक रिपोर्ट में बताया था कि भारतीय वायु सेना में 872 मिग-21 थे, जिनमें से 482 दुर्घटनाग्रस्त हुए, जिनमें 170 से ज्यादा पायलट मारे गए थे. साल 2010 से 2026 तक 20 हादसे हुए. अकेले 2021 में 5 मिग-21 बाइसन विमान दुर्घटना में तबाह हुए और तीन पायलट मारे गए. मई 2023 में राजस्थान के सूरतगढ़ के पास मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें तीन नागरिकों की मौत हुई थी.