सरकार ने देर रात लोकसभा से वक्फ संशोधन बिल 2024 पास करा लिया। बिल के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 वोट पड़े। सरकार ने इस बिल को लोकसभा से पास कराकर विपक्ष के कई भ्रम तोड़ दिए। विपक्ष को अब तक लगता था कि सेक्युलरिज्म के बहाने इस बिल पर टीडीपी और जेडीयू धर्म सकंट में हैं। वे किसी भी कीमत पर सरकार के साथ नहीं होगी, लेकिन दोनों पार्टियों के मनमुताबिक बदलाव पहले ही मोदी सरकार ने बिल में कर दिए थे। ऐसे में बीजेपी ने दोनों पार्टियों को पहले ही साध लिया था। ताकि सदन में कोई किरकिरी ना हो।
बिल पास करा सरकार ने दिखाया दम
मोदी सरकार को बने लगभग 9 महीने हो चुके हैं। 9 महीनों में पहली बार पीएम मोदी और बीजेपी ने दिखाया कि भले ही चुनाव में उनकी सीटें घटकर 240 रह गई है लेकिन फैसले लेने से पीछे नहीं हटने वाले हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने इस बिल को लेकर तैयारियां पहले ही कर ली थी। इस बिल को जेपीसी कमेटी में जानबूझकर भेजा गया था ताकि विपक्ष को बाद में इस मुद्दे पर राजनीति करने का मौका नहीं मिले। इसके बाद जेडीयू और टीडीपी को इस बिल पर दो मुद्दों पर आपत्ति थी। जिसमें जमीन से जुड़ा मुद्दा और दूसरा पुरानी मस्जिदों और दरगाहों को विवाद से दूर रखना। इन दोनों मुद्दों पर सरकार ने सहमति दे दी। इसके बाद परिणामस्वरूप दोनों दलों ने लोकसभा में भी सरकार का साथ दिया।
बीजेपी ने गढ़ी सेक्युलरिज्म की नई परिभाषा
वक्फ बिल पर मुहर के साथ ही देश में अब सेक्युलरिज्म की नई परिभाषा देखने को मिलेगी। बीजेपी का फोकस शुरुआत से ही पसमांदा वोटर्स पर रहा है। बिहार में चुनाव से पहले निचले तबके के मुस्लिमों के साधने के लिए सरकार ने सौगात-ए-मोदी किट का तोहफा दिया है। कुल मिलाकर लोकसभा से यह बिल पारित कराकर सरकार ने देश में धर्मनिरपेक्षता की राजनीति का गणित बदल दिया है।
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विपक्ष को घेरने की रणनीति
कुछ महीने बाद बिहार में चुनाव होने हैं। बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स का प्रभाव है। बिहार में नीतीश कुमार को पसमांदा वोटर्स के वोट मिलते रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ने निचले तबके के गरीब, बोहरा जैसे समुदायों को भी वक्फ बोर्ड में जगह दी है। जोकि बीजेपी की मुस्लिमों की साधने की रणनीति भी हो सकती है। उधर आरजेडी भी मुस्लिम वोटर्स को साधने के लिए लामबंद दिखाई दे रही है। एक बात तो बीजेपी जानती है कि मुस्लिम वोट उनकी पार्टी को नहीं मिलते हैं। लेकिन विपक्ष को उनके ही घर में घेरने की रणनीति कारगर साबित हो सकती है।
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