अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की 2 दिवसीय भारत यात्रा खत्म हो गई है, जो राजनयिक दौरों से अलग था. क्योंकि इस दौरे पर उन्होंने दिल्ली को दरकिनार किया और मुंबई-जामनगर का दौरा किया. खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज का निरीक्षण किया और यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और अमेरिका व्यापार समझौता साइन करने के करीब हैं. मार्को रुबियो के दौरे के दौरान वेनेजुएला के कच्चे तेल, रूस के कच्चे तेल, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते, अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत पर फोकस रहा. रुबियो ने मुंबई में जहां भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, वहीं जामनगर में देश के सबसे बड़े मशहूर उद्योगपति रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी के साथ उनकी रिफाइनरी और कंपनी का दौरा किया. इस दौरान उनके बीच कई बड़े मुद्दों पर चर्चा भी हुई.
मुंबई आतंकी हमला पीड़ितों को रुबियो की श्रद्धांजलि
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को मुंबई पहुंचे थे, जहां उन्होंने 26/11 आतंकी हमलों के पीड़ितों की याद में बनाए गए स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की. क्योंकि आतंकी हमले में 6 अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे. साथ ही उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मीटिंग की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, टेक्नोलॉजी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. विदेश मंत्री के अलावा टाटा ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रमुख एन चंद्रशेखरन और अदाणी ग्रुप के अध्यक्ष गौतम अदाणी से भी उन्होंने मुलाकात की. इसके बाद मार्को रुबियो रिलायंस ग्रुप के अध्यक्ष मुकेश अंबानी के साथ गुजरात के जामनगर के लिए रवाना हुए. जहां उन्होंने कंपनी की विशाल रिफाइनरी, नई एनर्जी गीगा फैक्ट्री और डेटा सेंटरों का दौरा किया. बुधवार का पूरा दिन उन्होंने जामनगर में बिताया और इस दौरान उन्होंने वंतारा घूमने का प्लान भी बनाया था.
दिल्ली की बजाय मुंबई और जामनगर को क्यों चुना?
मार्को रुबियों ने इस बार अपने दौरे के लिए दिल्ली के बजाय मुंबई को चुना, क्योंकि उनके दौरे का फोकस पॉइंट ऊर्जा और कारोबार था. बेशक भारत के दौरे पर आने वाले विदेशी मेहमानों का पड़ाव दिल्ली में होता है, लेकिन रुबियो का मुंबई-जामनगर दौरा कूटनीतिक लिहाज से स्पेशल था और अमेरिका की ऊजा सेक्टर एवं प्राइवेट बिजनेस सेक्टर में रुचि का संकेत था. रुबियो के दौरे का एक फोकस पॉइंट वेनेजुएला का कच्चा तेल भी था. अमेरिका चाहता है कि भारत वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदे. वेनेजुएला की मादुरो सरकार के पतन के बाद देश के कच्चे तेल पर अमेरिका का कंट्रोल हुआ. ट्रंप सरकार ने एक समझौता करके वेनेजुएला की ऊर्जा कंपनी NABEP की बड़ी हिस्सेदारी हासिल की. इस समझौते के तहत कंपनी को 65 अरब बैरल के प्रमाणित तेल भंडार पर कंट्रोल मिला है.
अमेरिका का फोकस रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी
वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार कच्चे तेल के तेल निर्यात से होने वाली आय है. इसलिए अमेरिका अब वेनेजुएला के लिए तेल के बड़े बाजार तलाश रहा है और इनमें भारत शामिल हो सकता है. इसके लिए अमेरिका की नजर भारत और खासकर यहां की रिलायंस इंडस्ट्रीज पर है, जिसकी जामनगर रिफाइनरी मेन फोकस पॉइंट है. भारत ने पिछले कुछ महीनों में वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है. जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी तक यह कच्चा तेल पहुंचा है. सितंबर 2026 में भारत ने वेनेजुएला से जितना कच्चा तेल खरीदा, उसमें 76 प्रतिशत तेल रिलायंस कंपनी ने खरीदा था. इसलिए मार्को रुबियो ने रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी से वेनेजुएला के कच्चे तेल के आयात पर चर्चा की. क्योंकि अमेरिका भारत की विशाल रिफाइनिंग मार्केट को वेनेजुएला के तेल का बाजार बनाना चाहता है.