हाल ही में एक भारतीय पेंटिंग ने दुनिया भर के कला प्रेमियों का ध्यान खींचा है। मशहूर चित्रकार तयब मेहता की 1956 में बनाई गई पेंटिंग “Trussed Bull” ने मुंबई की एक ऑक्शन में करोड़ों में बिककर नया रिकॉर्ड बना दिया। यह पेंटिंग न केवल अपने गहरे भाव और शक्तिशाली संदेश के लिए जानी जाती है बल्कि इसने तयब मेहता की कला को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है। इस पेंटिंग में दर्द, ताकत और लाचारी का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है जो इसे खास बनाता है। आइए जानते हैं इस शानदार तस्वीर के पीछे की कहानी।
नीलामी में तयब मेहता की पेंटिंग ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारतीय चित्रकार और मूर्तिकार तयब मेहता की 1956 में बनी पेंटिंग “Trussed Bull” ने हाल ही में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पेंटिंग मुंबई में 2 अप्रैल को आयोजित Saffronart की 5वीं वर्षगांठ लाइव ऑक्शन में ₹61.80 करोड़ में बिकी। यह कीमत इसके अनुमानित मूल्य से लगभग नौ गुना अधिक थी। इस नीलामी में यह भारत की दूसरी सबसे महंगी पेंटिंग बनी। इससे पहले अमृता शेर-गिल की ‘The Story Teller’ को भी इसी कीमत पर 2023 में बेचा गया था। Saffronart ने इस ऐतिहासिक बिक्री की जानकारी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की।
पेंटिंग में दिखी दर्द और ताकत की गहरी झलक
“Trussed Bull” नाम की इस पेंटिंग में एक बैल को दिखाया गया है जिसके हाथ-पैर रस्सियों से बंधे हुए हैं और वह बहुत तकलीफ में नजर आ रहा है। तयब मेहता ने इस चित्र को असरदार बनाने के लिए गहरे रंगों और मोटी रेखाओं का इस्तेमाल किया है। पेंटिंग की पीछे की जगह बहुत साधारण रखी गई है, जिससे देखने वालों का ध्यान सीधा बैल पर जाए। इसमें लाल और भूरे जैसे सीधे रंगों से दर्द और हिंसा का एहसास कराया गया है। इस पेंटिंग में ताकत, दर्द और लाचारी को बहुत अच्छे ढंग से दिखाया गया है।
तयब मेहता की कला में झलकता है बचपन का अनुभव
इस साल तयब मेहता की जन्मशताब्दी भी मनाई जा रही है। उनका जन्म गुजरात में हुआ था और उन्होंने 1952 में मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से ग्रेजुएशन किया था। युवावस्था में उन्हें बैलों से खास लगाव हो गया था। वे अक्सर बांद्रा के कसाईखाने और साउथ बॉम्बे के कैनेडी ब्रिज के पास बैलों को देखते थे। उनके अनुसार बैल बहुत शक्तिशाली होते हैं लेकिन जब उन्हें कसाईखाने में बांधकर फेंका जाता है तो यह दृश्य दिल को छू जाता है। उन्होंने बताया कि यह दृश्य उन्हें भीतर तक हिला देता था क्योंकि उसमें एक जीव की शक्ति और पीड़ा दोनों झलकती थीं।
इंसान की बेबसी को भी दिखाया कला के जरिए
एक इंटरव्यू में कला इतिहासकार यशोधरा डालमिया से बात करते हुए तयब मेहता ने बताया कि उनके लिए बैल सिर्फ एक चित्र नहीं था बल्कि एक प्रतीक था ऐसी ऊर्जा का जो बंधी हुई हो। उनका कहना था कि जिस तरह बैल को बांधकर गिरा दिया जाता है उसी तरह इंसान भी अपनी शक्ति के बावजूद जीवन में फंसा हुआ महसूस करता है। 1947 के बंटवारे के समय तयब मेहता ने अपने घर के बाहर एक व्यक्ति की हत्या होते देखी थी जो उनके मन में गहरी छाप छोड़ गई। उन्होंने अपनी कला के जरिए उस दर्द और संघर्ष को व्यक्त किया। तयब मेहता की यह पेंटिंग अब भारत की सबसे कीमती कलाकृतियों में से एक बन गई है। हालांकि सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग एम.एफ. हुसैन की ‘Untitled’ रही, जिसे पिछले महीने न्यूयॉर्क में ₹118 करोड़ में नीलाम किया गया था। तयब मेहता की कला और सोच आज भी दुनिया भर के कला प्रेमियों को प्रेरित कर रही है।
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