'हो सकता है मजाक को गलत समझने से हुआ झगड़ा…' त्रिपुरा छात्र एंजेल चकमा के मर्डर पर देहरादून पुलिस

एंजेल चकमा की हत्या के मामले में पुलिस ने अभी तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों में से एक, जो नेपाल का नागरिक है, घर भाग गया है.

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एंजेल चकमा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था.

उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा को पहले नस्लीय टिप्पणी करके चिढ़ाया जाता है, जब उसने विरोध किया तो उसे इतनी बेरहमी से पीटा जाता है कि उसकी मौत हो जाती है. हालांकि, पुलिस का मानना है कि यह हत्या संभवतः नस्लीय हमला नहीं थी. साथ ही कहा कि वे सभी एंगल से इस मामले की जांच करेंगे.

एनडीटीवी से बात करते हुए देहरादून के SSP अजय सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने चकमा पर हमला किया, उनमें एक मणिपुर का था, एक नेपाल का और एक आदिवासी था. उन्होंने कहा कि इस वजह से जिन ‘नस्लीय और जाति-सूचक’ शब्दों की बात की जा रही है – वे आरोप कहीं टिकते नहीं हैं.

जब एंजेल पर हमला हुआ था, उसका भाई माइकल भी उसके साथ था. माइकल ने 27 दिसंबर को नस्लवादी हमले की बात कही थी. एसएसपी ने कहा कि शुरुआती जांच में ऐसी बात सामने नहीं आई थी. लेकिन अब पीड़ित पक्ष ने इनपुट दिया है तो उसकी जांच भी की जाएगी.

‘चीनी’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर, एसएसपी ने कहा कि हो सकता है कि हमलावरों के बीच मजाक में ऐसा कहा गया हो, जिसे पीड़ितों ने गलत समझ लिया.

अधिकारी ने कहा, ‘वे खुद का मजाक उड़ा रहे थे, वे 15-22 साल के बच्चे थे जो एक पार्टी में बाहर आए थे…’

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के हवाले से अधिकारी ने कहा कि उन्होंने बताया कि हमने उन पर कभी कोई टिप्पणी नहीं की, न ही हमारा ऐसा कोई इरादा था. लेकिन उन्हें ऐसा लगा कि वे टिप्पणियां उन पर की जा रही हैं. इस वजह से, वहां बात बढ़ गई और झड़प हो गई.

बता दें, एंजेल चकमा और उसके भाई पर 9 दिसंबर को हमला हुआ था. स्थानीय लोगों के साथ हुआ विवाद इतना बढ़ गया था कि उन पर चाकू और दूसरे हथियारों से हमला कर दिया गया. माइकल के सिर पर वार किया गया था, जबकि एंजेल की गर्दन और पेट में चाकू घोंपा गया था.

इस मामले में पांच लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें दो नाबालिग हैं और उन्हें किशोर सुधार गृह भेजा गया है. आरोपियों में से एक, जो नेपाल का नागरिक है, घर भाग गया है. उस पर 25,000 रुपये के इनाम की घोषणा की गई है. एक पुलिस टीम नेपाल भी भेजी गई है.

एंजेल चकमा को इतनी बेरहमी से पीटा गया था कि अस्पताल में वह 14 दिनों तक जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा. उसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. उसकी मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, चकमा के ब्रेन में ब्लीडिंग हुई थी. सिर की चोट के अलावा, उसके हाथ-पैरों पर कई जगह गहरे जख्म थे. रीढ़ की हड्डी को भी गंभीर नुकसान पहुंचा था और जिसकी वजह से शरीर के दाहिने हिस्से में हलचल बंद हो गई थी.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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