सुप्रीम कोर्ट में आज सोमवार को 2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई होगी. केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से UPI से ‘पर्सन टू मर्चेंट’ ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने का आदेश दिया है. इस आदेश के खिलाफ वकील रंजन दत्ता ने जनहित याचिका दायर की है, जिसमें 14 सितंबर 2026 को जारी की गई अधिसूचना और 15 सितंबर 2026 को जारी MDR के स्ट्रक्चर को चुनौती दी गई है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच याचिका पर सुनवाई करेगी.
UPI पेमेंट पर लगा है 0.4 प्रतिशत MDR
बता दें कि 6 साल से UPI ट्रांजेक्शन फ्री है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब इस पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगा दिया है. नया नियम आगामी 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा, जिसके तहत UPI से 2000 रुपये तक की पेमेंट करने पर 0.4 प्रतिशत चार्ज देना होगा. 75000 रुपये या उससे ज्यादा की पेमेंट पर चार्ज 300 रुपये लगेगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती से जुड़े सामान की खरीद पर 2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR देना होगा. कैपिटल और मार्केट UPI ट्रांजेक्शन पर 0.02 प्रतिशत MDR देना होगा, जिसकी सीमा 300 रुपये होगी. लेकिन UPI से पर्सन टू पर्सन ट्रांजेक्शन को पूरी तरह मुफ्त रखा गया हैं. यानी लोग अपने दोस्तों, परिजनों या रिश्तेदारों को फ्री में UPI ट्रांजेक्शन कर सकेंगे. UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक की पेमेंट भी फ्री होगी.
क्या है पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट?
वकील रंजन दत्ता ने जनहित याचिका में दलील दी है कि बिना किसी सिक्योरिटी, ट्रांसपेरेंसी और लोगों के सुझाव के चार्ज लगाया गया है. ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007’ की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिकता पर भी उन्होंने याचिका में सवाल उठाए और चिंता जताई कि इस तरह UPI पेमेंट पर अचानक चार्ज लगा देना मनमानी और भेदभावपूर्ण रवैया है. याचिका में ट्रांजैक्शन लिमिट, रेट, कैप और सेक्टर के कैटेगराइजेशन के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप हैं कि नए नियम ओर उसके फ्रेमवर्क को ऑफिशियल गजट में ठीक ढंग से पब्लिश नहीं किया गया है. UPI और RuPay डेबिट-कार्ड पेमेंट के साथ अलग-अलग ट्रीटमेंट पर भी सवाल है, क्योंकि RuPay डेबिट-कार्ड पेमेंट चार्ज फ्री है.
याचिकाकर्ता ने UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को रोकने या रद्द करने की मांग की है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और केंद्र सरकार को शामिल करते हुए इंडिपेंडेंट रिव्यू कराने भी मांग की गई है.