देश में डेमोग्राफिक बदलावों और अवैध घुसपैठ से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए गृह मंत्रालय की उच्च-स्तरीय समिति ने डिजिटल वेब पोर्टल लॉन्च किया है. अब आम नागरिक भी इस पोर्टल के जरिए असामान्य जनसांख्यिकीय बदलावों, उनके संभावित कारणों और बसावट के असामान्य पैटर्न से जुड़ी जानकारी समिति के साथ साझा कर सकेंगे. समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) ने नई दिल्ली में इस पोर्टल का शुभारंभ किया. यह पोर्टल https://demography.mha.gov.in पर उपलब्ध है. इसे आम जनता के उपयोग, विभिन्न हितधारकों से जानकारी जुटाने और आंकड़ों के आधार पर संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है.
केंद्र और राज्य सरकारें भी दे सकेंगी जानकारी
पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, संस्थाओं और आम नागरिकों को जानकारी साझा करने की सुविधा मिलेगी. इसमें अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलावों, उनके संभावित कारणों, अंतर्निहित कारकों और असामान्य बसावट के पैटर्न से संबंधित इनपुट दिए जा सकेंगे. समिति इन जानकारियों के आधार पर जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों का विश्लेषण करने और उनसे जुड़े कारकों की पहचान करने का प्रयास करेगी. इसका एक प्रमुख उद्देश्य देश में रह रहे अवैध घुसपैठियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत तथा निर्वासन के लिए एक सुव्यवस्थित और स्थायी परिचालन प्रणाली की सिफारिश करना है.
26 मई 2026 को हुआ था समिति का गठन
गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को इस उच्च-स्तरीय समिति का औपचारिक गठन किया था. समिति को अवैध घुसपैठ सहित जनसांख्यिकीय बदलावों से उत्पन्न चुनौतियों का व्यापक अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है. समिति प्रजनन दर में अंतर, सीमा पार आवागमन, आर्थिक अवसरों और सामाजिक-पर्यावरणीय कारकों जैसे पहलुओं का अध्ययन करेगी. इसके साथ ही अवैध घुसपैठ, नियोजित प्रवास और असामान्य बसावट के पैटर्न जैसे कारकों की पहचान भी उसके कार्यक्षेत्र में शामिल है.
सीमा प्रबंधन पर भी होगा जोर
समिति धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर जनसंख्या की संरचना में होने वाले बदलावों का विश्लेषण भी करेगी, विशेष रूप से उन बदलावों का जो सामान्य जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों से अलग दिखाई देते हैं. इसके अलावा सीमा प्रबंधन, जनसंख्या स्थिरीकरण और पहचान प्रणालियों को मजबूत करने के साथ-साथ ऐसी प्रवृत्तियों की निरंतर निगरानी के लिए संस्थागत तंत्र विकसित करने की सिफारिश की जाएगी. अवैध घुसपैठ और उससे जुड़े जनसांख्यिकीय असंतुलन के मामलों में केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी भी समिति को सौंपी गई है. समिति अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र के तहत इन चुनौतियों से निपटने के लिए अन्य उपयुक्त उपायों की सिफारिश भी कर सकती है. नए पोर्टल के जरिए मिलने वाले इनपुट समिति के अध्ययन और नीतिगत सिफारिशों के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं.