कश्मीरी पंडितों को आतंकियों की धमकी, नाम और पते पर भेजे गए लेटर, लिखा- हद में रहो, हर हरकत पर है नजर

कश्मीरी पंडितों को आतंकियों ने फिर से धमकाना शुरू कर दिया है. इस बार तो सरेआम धमकाया गया है और नाम-पते पर लेटर भेजे गए हैं. वहीं जिसने धमकी भरा लेटर भेजा है, वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोर्चा बताया जा रहा है.

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कश्मीरी पंडितों को दशकों बाद आतंकी संगठनों ने धमकाया है. (Credit- AI)

आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को दशकों बाद एक बार फिर से धमकाया है और लेटर भेजकर धमकी दी गई है. लेटर भी नाम के साथ पते पर भेजे गए हैं. लेटर में कश्मीरी पंडितों के मकान नंबरों और गली नंबरों तक का जिक्र किया गया है. पूरे नाम-पते के साथ डिटेल में स्टैम्प वगैरा लगाकर लेटर भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई है, यानी आतंकियों ने बिना किसी डर के सरेआम कश्मीरी पंडितों को धमकाया है और बुरा अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई है.

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आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को गद्दार कहा

आतंकियों ने लेटर में लिखा है कि कश्मीरी पंडित गद्दार हैं और दिल्ली में बैठे सरकार में शामिल अपने मालिकों के कहने पर, उनके इशारे पर काम कर रहे हैं. जो कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर को छोड़कर नहीं गए थे, वे अपने आप को सुरक्षित समझें. लेकिन जो कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर छोड़कर चले गए हैं, वे RSS एजेंट बन गए हैं और RSS का एजेंडा चला रहे हैं. पहले भी चेतावनी दी थी, ध्यान रहे कि कश्मीरी पंडितों की हर हरकत पर हमारी नजर है.

यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने भेजा लेटर

कश्मीर पुलिस और प्रशासन अधिकारियों का कहना है कि लेटर में अहमद बिलाल नामक शख्स के साइन हैं. 2 लेटर भेजे गए हैं, लेकिन किसने और कहां से भेजे हैं? इसका सुराग अभी तक नहीं मिला है, जल्दी पता लगा लेंगे. प्राथमिक जांच के अनुसार, लेटर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने भेजा है, लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी है. जो कश्मीरी पंडितों को धमकाकर डरा रहा है. अब से पहले भी कश्मीरी पंडितों को धमकी भरे लेटर भेजे गए थे, जिनमें फोन नंबर लिखे थे.

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कौन हैं कश्मीरी पंडित, क्यों किया पलायन?

कश्मीरी पंडित कश्मीर घाटी के मूल निवासी हैं और हिंदू समुदाय के लोग हैं, जो सारस्वत ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. 1990 के दशक में आतंकवाद और हिंसा के कारण लाखों कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी से पलायन करना पड़ा था. कश्मीर घाटी से पलायन के बाद कश्मीरी पंडित जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य शहरों में जाकर बस गए थे. आज भी लाखों कश्मीरी पंडित निर्वासितों की जिंदगी जी रहे हैं और कश्मीर वापस आने के नाम तक से डरते हैं.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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