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जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा में मरने वालों के आंकड़े चौंकाएंगे, पहलगाम हमले के बाद भी तगड़ी गिरावट

Terror Deaths 2025 in Jammu and kashmir: जम्मू और कश्मीर में पिछले साल आतंकी हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा अब जारी हुआ है, गौर करने लायक बात यह है कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बावजूद इस संख्या में पिछले सालों के मुकाबले जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है. पढ़ें, कश्मीर से आसिफ सुहाफ की स्पेशल रिपोर्ट

Terror Deaths 2025 in Jammu and kashmir: जम्मू और कश्मीर में आतंकी घटनाओं में साल 2025 में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली, इसी वजह से मरने वाले की संख्या 100 के नीचे रही. जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार 2025 में सिर्फ 92 लोगों की आतंकी हिंसा में मौत हुई. यह एक बड़ी गिरावट है जो दशकों में पहली बार हुआ है कि सालाना मरने वालों की संख्या 100 से नीचे आई है, आंकड़ों से पता चलता है कि इन 92 लोगों में 46 आतंकवादी मारे गए, जिनमें ज़्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे, साथ ही 17 सुरक्षाकर्मी और 28 नागरिक भी मारे गए. साल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बावजूद आतंकी हिंसा में मरने वालों की संख्या में आई ऐतिहासिक गिरावट लगातार खतरों के बीच सुरक्षा उपायों को और मज़बूत करने पर ज़ोर देता है.

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क्या कहते हैं जम्मू-कश्मीर पुलिस के आंकड़े

आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 की 127 मौतों (69 आतंकवादी, 26 सुरक्षा बल, 31 नागरिक) की तुलना में 2025 में 92 मौतें (46 आतंकवादी, 17 सुरक्षा बल, 28 नागरिक) यह गिरावट बहुत ज़्यादा है. पिछले सालों में मरने वालों की संख्या और भी ज़्यादा थी: 2023 में 134, 2022 में 253, 2021 में 274, और 2020 में सबसे ज़्यादा 321, जब 232 आतंकवादी, 56 सुरक्षाकर्मी और 33 नागरिक मारे गए थे. सुरक्षा बलों ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के साथ ऑपरेशन तेज़ कर दिए, 13 घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया और उत्तरी कश्मीर में आठ आतंकवादियों को मार गिराया. लगभग 3,000 छापे आतंकी नेटवर्क को निशाना बनाकर मारे गए, मुख्य रूप से कश्मीर घाटी में लेकिन जम्मू में भी, जिससे संगठनों को चौबीसों घंटे खत्म किया गया.

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जम्मू-कश्मीर पुलिस की चुनौतियां कायम

जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए फिर भी चुनौतियां बनी हुई हैं. आधिकारिक अनुमानों के अनुसार J&K में 132 सक्रिय आतंकवादी हैं, जिनमें 122 विदेशी - ज़्यादातर पाकिस्तानी - हैं, जिनकी संख्या इस साल दोगुनी हो गई है. स्थानीय भर्ती बहुत कम हुई है, सिर्फ़ एक भर्ती हुई है. विशेषज्ञ इस गिरावट का श्रेय अनुच्छेद 370 हटने के बाद लगातार चलाए जा रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों को देते हैं, हालांकि अधिकारी विदेशी समर्थित खतरों के बारे में चेतावनी देते हैं. एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने News24 को बताया, "हमारे बलों ने खतरों को सक्रिय रूप से बेअसर किया है, लेकिन सतर्कता महत्वपूर्ण बनी हुई है."

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