तमिलनाडु के नागपट्टिनम में खुदाई के दौरान आर्किओलॉजी डिपार्टमेंट को दो बेहद खास कांस्य मूर्तियां मिली हैं. इनमें भगवान नटराज और देवी शिवकामी की मूर्तियां शामिल हैं. शुरुआती जांच में इनका संबंध चोल काल से बताया जा रहा है. तमिलनाडु के मंत्री ए. राजमोहन ने इस खोज की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 3 अगस्त से नागपट्टिनम में खुदाई का काम चल रहा है. इसी दौरान जमीन से करीब एक मीटर नीचे ये दोनों मूर्तियां अपने आधार के साथ मिलीं. मंत्री ने सोशल मीडिया पर मूर्तियों की तस्वीरें भी साझा कीं. उन्होंने कहा कि इस तरह की खोज से तमिल लोगों के पुराने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को समझने में मदद मिलती है. उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में प्राचीन अवशेष से जुड़े काम आगे बढ़ाए जा रहे हैं.
110 सेंटीमीटर ऊंची है भगवान नटराज की मूर्ति
भगवान नटराज की मूर्ति 110 सेंटीमीटर ऊंची और 100 सेंटीमीटर चौड़ी है. इसमें भगवान शिव को चार हाथों के साथ नृत्य करते हुए दिखाया गया है. उनकी यह मुद्रा आनंद तांडव के नाम से जानी जाती है. वहीं, देवी शिवकामी की मूर्ति 82 सेंटीमीटर ऊंची और 23 सेंटीमीटर चौड़ी है. इसमें देवी को खड़े हुए दिखाया गया है. उनके दो हाथ हैं और शरीर की बनावट में तीन जगह हल्का मोड़ दिखाई देता है. इस खास मुद्रा को त्रिभंग कहा जाता है.
12वीं शताब्दी की हो सकती हैं मूर्तियां
विशेषज्ञों ने शुरुआती जांच में मूर्तियों की बनावट, उन पर की गई नक्काशी और उनके आधार को देखा है. इसके आधार पर माना जा रहा है कि ये मूर्तियां 12वीं शताब्दी की हो सकती हैं. यानी इनका संबंध चोल शासन के अंतिम दौर से माना जा रहा है. एक अधिकारी के अनुसार, इन मूर्तियों से उस समय की धार्मिक परंपराओं और कांस्य की मूर्तियां बनाने की कला के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है. इनके जरिए नागपट्टिनम के पुराने समुद्री व्यापार और कला के इतिहास को समझने में भी मदद मिलेगी. नागपट्टिनम पहले भी जमीन के नीचे दबे पुराने खजानों और धातु की मूर्तियों के लिए चर्चा में रहा है. यहां मिली यह नई खोज भी तमिलनाडु के इतिहास को समझने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.