Swiss President Guy Parmelin India Visit: स्विस कॉन्फेडरेशन के राष्ट्रपति गाय परमेलिन पीएम नरेंद्र मोदी के इंविटेशन पर 3 दिन के स्टेट विजिट के लिए सोमवार को भारत पहुंचे. 5 से 7 अक्टूबर तक होने वाली इस यात्रा का मकसद भारत-स्विट्जरलैंड के रिश्तों को आगे बढ़ाना है. इसमें ट्रेड, इंवेस्टमेंट, साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और मोबिलिटी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. ये परमेलिन की भारत की पहली राजकीय यात्रा है और इस साल उनकी दूसरी यात्रा है. इससे पहले वो फरवरी में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे.
परमेलिन को मिला ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
भारत पहुंचने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राष्ट्रपति भवन में गाय परमेलिन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. स्विस प्रेसिडेंट एक हाई लेवल डेलिगेशन के साथ आए हैं, जिसमें सीनियर सरकारी अधिकारी और बिजनेस रिप्रेजेंटेटिव्स शामिल हैं. सोमवार को वो सहयोग के कई क्षेत्रों में हुई प्रगति का जायजा लेने के लिए पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे.
चर्चा में व्यापार और निवेश, विज्ञान और तकनीक, इनोवेशन, मोबिलिटी, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे मुद्दे शामिल होने की उम्मीद है. रीजनल और ग्लोबल डेवलपमेंट के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग पर भी बातचीत होगी. परमेलिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे, जो उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज का आयोजन करेंगी. विदेश मंत्री एस जयशंकर भी स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे.
भारत-EFTA व्यापार समझौते पर फोकस
गाय परमेलिन की यात्रा का एक अहम हिस्सा 7 अक्टूबर को दूसरे भारत-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट में उनकी भागीदारी होगी. ये कार्यक्रम भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के लागू होने की पहली सालगिरह के मौके पर हो रहा है. EFTA के 4 मेंबर्स, स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टीन में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा ट्रेड और इंवेस्टमेंट पार्टनर है.
गाय परमेलिन ने क्या कहा?
भारत पहुंचने के बाद गाय परमेलिन ने कहा कि ये विजिट दोनों देशों के बीच रिश्तों की अहमियत को अंडरलाइन करने का मौका देगी. उन्होंने बाइलेट्र्ल रिलेशन की नींव के तौर पर शेयर्ड डेमोक्रेटिक वैल्यूज, भरोसे और आपसी सम्मान पर जोर दिया. स्विस राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी यात्रा लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और मजबूत करने और द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा को आसान बनाने में मदद करेगी. TEPA का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी पहली सालगिरह अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने और भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच भविष्य के सहयोग को आकार देने की दिशा में काम करने का एक मौका है.
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