'अरेस्ट की वजह लिखित में बतानी होगी', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; पंजाब पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई का आदेश

शिरोमणि अकाली दल के नेता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक जजमेंट दिया है, जिसके बारे में देशवासियों को पता होना चाहिए और पुलिसकर्मियों को भी उसे लेकर अलर्ट रहना होगा. किसी भी मामले में गिरफ्तारी से पहले पुलिसकर्मियों को अरेस्ट की वजह लिखित में बतानी होगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं. Credit- SupremeCourt/Magnific

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सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है, जिसके तहत कारण लिखित में बताए बिना गिरफ्तारी को अवैध करार दिया गया है और ऐसा न करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है. जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने फैसला सुनाते हुए संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत किए गए प्रावधान का मतलब स्पष्ट किया है. बेंच ने कहा कि अगर कारण लिखित में नहीं बताया जाएगा तो गिरफ्तारी को अवैध माना जाएगा. संविधान के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन ऐसे ही नहीं किया जा सकता, बेशक शख्स ने गंभीर अपराध क्यों न किया हो या वह असामाजिक गतिविधियों ने क्यों न शामिल रहा हो?

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PMLA-UAPA के तहत भी अरेस्ट कारण बताकर होगी

सुप्रीम कोर्ट बेंच ने अपने आदेश में कहा कि अनुच्छेद-22 के तहत किया गया प्रावधान कुछ मामलों में गिरफ्तारी से छूट देता है. देश की कोई भी जांच एजेंसी हो, उसे आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले उसे अरेस्ट का कारण लिखित में बताना ही होगा. यह नियम सभी मामलों में लागू होता है, चाहे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ही गिरफ्तार क्यों न करना हो. अनुच्छेद 22(1) के तहत लिखित में कारण बताए बिना की गई गिरफ्तारी को गैर-कानूनी करार दिया जाएगा. वहीं अगर किसी आरोपी की गिरफ्तारी रद्द की जा चुकी है और उसे फिर से गिरफ्तार करना हो तो मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी ही होगी.

BNS/BNSS के तहत दर्ज मामलों में लागू होगा नियम

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि चार्जशीट दाखिल करने के बाद भी गिरफ्तारी तब तक लीगल नहीं मानी जाएगी, जब तक लिखित में गिरफ्तारी का कारण न बताया गया हो. यानी अनुच्छेद-22 के नियमों का पालन BNS/BNSS के तहत दर्ज सभी मामलों में होगा. अनुच्छेद 22 (1) के तहत गिरफ्तारी का कारण लिखित में भी साफ-साफ तरीके से बताना होगा. मुख्य सिद्धांतों को विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के आधार ऐसी भाषा में होने चाहिए जिसे आरोपी समझ सके. वहीं लिखित में बताए गए कारणों की एक कॉपी गिरफ्तार किए जाने वाले शख्स को भी देनी होगी. अनुच्छेद 22 और अनुच्छेद 22 (1) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

पंजाब पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच के आदेश दिए

मामला शिरोमणि अकाली दल के मुल्लांपुर डाखा प्रभारी जसकरणजीत सिंह की गिरफ्तारी का हे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी करार दिया है. जसकरणजीत सिंह पर नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोप थे, लेकिन उन्हें कारण लिखित में बताए बिना गिरफ्तार किया गया था. जसकरणजीत सिंह ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन जज ने गिरफ्तारी को सही ठहराया. इस फैसले के खिलाफ उन्होंने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद बीते दिन फैसला दिया गया.

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दूसरे पुलिस अधिकारी को मामले की जांच सौंपी जाएगी

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा कि मामाले में आगे की जांच और कार्रवाई किसी और पुलिस अधिकारी को सौंपनी होगी. वहीं उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच बिठाई जाए, जिसने गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया था. अगर जांच में पुलिस अधिकारी दोषी साबित हुई तो उसकी सर्विस बुक में एंट्री की जाए और विभागीय कार्रवाई की जाए. फैसले की एक कॉपी देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस विभाग प्रमुखों को भेजी जाए और अनुच्छेद 22 को फॉलो किया जाए.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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