देश भर में बच्चों के गायब होने की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है. अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह गहराई से जांच करे कि इन घटनाओं के पीछे कोई देशव्यापी संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि यह समझना बहुत जरूरी है कि क्या इन अपहरणों के पीछे कोई खास पैटर्न है या फिर ये अलग-अलग होने वाली घटनाएं हैं. कोर्ट ने साफ किया कि मासूमों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को सभी राज्यों से तुरंत जानकारी जुटानी चाहिए.
राज्यों के सुस्त रवैये पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि कुछ राज्यों ने डेटा दे दिया है, लेकिन करीब एक दर्जन राज्य अब भी जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि डेटा न देने वाले राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं. कोर्ट का मानना है कि जब तक पूरे देश का डेटा एक साथ नहीं आता, तब तक इस समस्या की जड़ तक पहुंचना मुमकिन नहीं है. सरकार को निर्देश दिया गया है कि पिछले 6 सालों का पूरा ब्योरा कंपाइल कर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए.
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बचाए गए बच्चों के इंटरव्यू का सुझाव
अदालत ने सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि जिन बच्चों को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाया गया है, उनके इंटरव्यू किए जाने चाहिए. इन बच्चों से बात करने पर अपराधियों के तौर-तरीकों और उनके गिरोह के बारे में अहम सुराग मिल सकते हैं. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि बच्चों को आखिर कौन और किस मकसद से उठा रहा है. बेंच ने कहा कि हर घटना के बीच कोई न कोई आपसी संबंध हो सकता है, जिसे केवल गहन विश्लेषण के जरिए ही समझा जा सकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
हर 8 मिनट में गायब होता है एक बच्चा
यह पूरा मामला एक एनजीओ की याचिका के बाद चर्चा में आया है जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 8 मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है, जो समाज और प्रशासन के लिए एक डरावनी तस्वीर है. सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सभी राज्यों से समन्वय बिठाकर एक सही सिस्टम तैयार करे ताकि गायब बच्चों की तलाश और उनकी सुरक्षा को लेकर बेहतर तरीके से काम हो सके. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों के लापता होने का मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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