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डीपफेक वीडियो वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- हाई कोर्ट जाओ पहले

Supreme Court Deep Fake Video: डीपफेक वीडियो से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से आज सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पहले हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट।
Supreme Court Deep Fake Video: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनने वाले डीपफेक वीडियो को रोकने के लिए पॉलिसी बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया। याचिका में डीपफेक वीडियो के लिए कोर्ट की निगरानी में एक एक्सपर्ट कमेटी के गठन की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट में पहले से लंबित केस में आवेदन दायर करने को कहा। याचिका एक वकील की ओर से दायर की गई थी, जो जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष पेश की गई थी, लेकिन बेंच ने सुनवाई करने से इनकार करके याचिकाकर्ता को निर्देश दे दिया। यह भी पढ़ें:‘मुस्लिम एक्टर-एक्ट्रेस से भेदभाव नहीं, लेकिन…’, शिवसेना नेता संजय निरुपम के 6 बड़े बयान

दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित याचिकाएं

याचिकाकर्ता वकील की ओर से अपनी याचिका में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी मीडिया से साझा करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी के डीपफेक वीडियो भी ऑनलाइन सर्कुलेट हो रहे है। डीपफेक वीडियो के संभावित खतरे को देखते हुए सख्त नियमों की जरूरत है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका पढ़ने के बाद कहा कि डीपफेक टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियम बनाने की मांग वाली कई याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट में पहले से लंबित हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच पहले ही उन याचिकाओं पर सुनवाई करds केंद्र सरकार से जवाब तलब कर चुकी है। यह भी पढ़ें:डरपोक पाकिस्तान का बड़ा फैसला, रावलपिंडी से शिफ्ट करेगा जनरल हेडक्वार्टर, जानें क्यों उठाया कदम?

केंद्र और चुनाव आयोग को बनाया पक्षकार

सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि अब अगर हम सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हैं तो हाई कोर्ट में सुनवाई रुक जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के साथ-साथ दिल्ली हाई कोर्ट को भी निर्देश दिया कि अगर याचिकाकर्ता दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करता है तो उसके सुझाव पर गौर करें। याचिका में मांग की गई है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर AI जेनरेटेड/डीपफेक कंटेट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए नियम बनाए जाएं। याचिका में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को पक्षकार बनाया गया है।


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