सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने जुलाई 2026 की जंतर-मंतर हिंसा की जांच के लिए लॉन्च किया पोर्टल, कैसे दर्ज करें शिकायतें?

Jantar Mantar Violence: नीट एग्जाम में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जुलाई 2026 में जंतर-मंतर के पास हिंसा देखने को मिली थी. इससे जुड़ी शिकायतें दर्ज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने एक पोर्टल लाॉन्च कर दिया है.

Supreme Court PTI

सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने जंतर-मंतर हिंसा की जांच के लिए लॉन्च किया पोर्टल (Photo-PTI)

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित ‘हाई पावर्ड इंक्वायरी कमिटी’ (HPEC) ने एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है. इसके ज़रिए जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर और राजधानी के बाहर दूसरी जगहों पर हुई हिंसा के बारे में शिकायतें और जानकारी दी जा सकती है. ये सुविधा प्रभावित लोगों के लिए है, जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस समिति का गठन देश की सबसे बड़ी अदालत के 18 अगस्त 2026 के आदेश के तहत किया गया था. इसकी जांच में वो मुद्दे भी शामिल होंगे, जिनका जिक्र कोर्ट के 10 सितंबर के आदेश में किया गया है. http://hpec.nic.in पोर्टल का मकसद शिकायतें और जरूरी जानकारी देने की प्रक्रिया को आसान बनाना है.

विज्ञापन

HPEC किन चीजों की जांच करेगी?

कमेटी उन आरोपों को प्रायोरिटी देगी जिनमें कहा गया है कि पुलिस और दूसरी एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया. इनमें बिना उचित चेतावनी दिए या जरूरत से ज्यादा मात्रा में पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप शामिल हैं.

विज्ञापन

ये समिति महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों की भी जांच करेगी. साथ ही ‘सेकेंडरी विक्टिमाइजेशन’ (यानी घटना के बाद फिर से पीड़ित बनाए जाने) के दावों पर भी गौर किया जाएगा. एक और अहम पहलू ये होगा कि पुलिस की कार्रवाई से प्रभावित लोगों को मेडिकल हेल्प, दूसरी जरूरी मदद और मुआवजा मिला या नहीं.

विज्ञापन

ये पैनल अपनी ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और उनके परिवारों द्वारा झेले गए मानसिक और भावनात्मक तनाव पर भी विचार करेगा. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, दोनों पक्षों की तरफ की गई हद से ज्यादा हिंसा और संपत्ति के नुकसान के आरोपों को भी प्रायोरिटी दी जाएगी.

शिकायतें कैसे दर्ज करें?

HPEC पोर्टल पर जानकारी देने के कई तरीके हैं, जिसे ये कमेटी जुलाई की घटनाओं की अपनी जांच के हिस्से के तौर पर दर्ज की गई शिकायतों की समीक्षा करेगी.

विज्ञापन
  • प्रभावित शख्स: प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं. उन्हें उचित नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है.
  • गोपनीय शिकायतें: संवेदनशील गवाह अपनी पहचान सुरक्षित रखने की मांग कर सकते हैं. ऐसे मामलों में सुनवाई बंद कमरे में (इन-कैमरा) की जा सकती है.
  • गुमनाम शिकायतें: लोग अपनी पहचान बताए बिना भी जानकारी दे सकते हैं.
  • दूसरे मुद्दे: लोग अदालत के आदेशों के दायरे में आने वाले मामलों से जुड़ी जानकारी और सुझाव भी दे सकते हैं.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ