दिल्ली में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के पास प्रदर्शन कर रहे करीब 50 से 60 वकीलों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. इनमें कई महिला वकील भी शामिल थीं. यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच हुई. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के दखल देने के बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को छोड़ा गया.
वकीलों की हिरासत पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष प्रदीप राय ने सुबह करीब 11:30 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को उठाया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपने चैंबर से वकीलों को हिरासत में लिए जाने की खबर बेहद परेशान करने वाली है. प्रदीप राय ने कहा कि यह मामला CJI के सामने रखा जा रहा है. उन्होंने वकीलों को तुरंत छोड़ने की मांग की. करीब 10 मिनट बाद उन्होंने एक और पोस्ट में बताया कि नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त से उनकी बात हुई है. DCP ने भरोसा दिया कि वकीलों को तुरंत रिहा किया जाएगा.
SCBA ने CJI को पत्र लिखा
SCBA की मानद सचिव प्रज्ञा बागेल ने भी CJI को पत्र लिखकर मामले में तुरंत दखल देने की मांग की. पत्र में कहा गया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे कई वकीलों को हिरासत में लिया गया. आरोप है कि पुलिस ने इस दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया. बार एसोसिएशन ने कहा कि हिरासत में लिए गए वकीलों की जगह और उनकी सुरक्षा का पता लगाया जाए. साथ ही, उन्हें कानूनी मदद मिलनी चाहिए और जिन लोगों को हिरासत में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए. एसोसिएशन ने पुलिस के बल इस्तेमाल करने के मामले की जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की भी मांग की.
CJP के प्रदर्शन से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा
यह मामला 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले CJP के प्रदर्शन से पहले सामने आया. प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाया गया था. CJP ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने मंजूरी नहीं दी थी. इसके बाद भी प्रदर्शनकारी वहां जुट रहे थे. इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी.