आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, शैक्षणिक संस्थानों- अस्पताल परिसरों में डॉग्स की एंट्री बैन

दिल्ली-एनसीआर में शुरू हुआ आवारा कुत्तों का मामला अब पूरे देश में फैल चुका है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हैं। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आवारा कुत्तों पर बड़ा फैसला सुनाया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सुनाया बड़ा फैसला।

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने देशभर के सभी शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस पर अमल करने को कहा है।

कोर्ट ने कहा कि इस परिसरों की चारदीवारी की जाए ताकि आवारा कुत्तो की एंट्री न हो सके। इन जगहों से जो आवारा कुत्तो को हटाया जाएगा फिर उन्हें इन इलाकों में ही छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। कोर्ट ने राज्यों के चीफ सेकेट्री को इन निर्देशों पर अमल करने को कहा है। राज्य 3 हफ्ते में इसको लेकर स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करेंगे।

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इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों, स्टेट और नेशनल हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाने ले लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, रोड और ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी से कहा है कि वो सड़कों से आवारा जानवरों को हटाकर शेल्टर होम में शिफ्ट करें। साथ ही सभी नेशनल हाईवे पर हेल्पलाइन नंबर होगा जहां पर आवारा जानवरों को लेकर शिकायत की जा सके।

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मेनका गांधी ने उठाया सवाल

पशु अधिकार कार्यकर्ता और भाजपा नेता मेनका गांधी ने कहा कि न्यायमूर्ति पारदीवाला के फैसले जितना ही बुरा है, या उससे भी बदतर है। इसे अमल में नहीं लाया जा सकता। कहा कि अगर 5000 कुत्तों को हटा दिया जाए, तो आप उन्हें कहां रखेंगे? आपको 50 आश्रय गृहों की आवश्यकता है लेकिन आपके पास वे नहीं हैं। आपको उन्हें उठाने के लिए लोगों की आवश्यकता है। 5000 कुत्तों को हटाने से क्या फर्क पड़ेगा? अगर यहां 8 लाख कुत्ते हैं, तो 5000 कुत्तों को हटाने से क्या बदलाव आएगा? सवाल यह है कि अगर यह संभव होता, तो ऐसा किया जाता।

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