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दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस बर्बरता की जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI ने कमेटी से एक महीने में मांगी रिपोर्ट

दिल्ली प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ज्यादतियों की जांच कर रही हाई-पावर्ड कमेटी को सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने के भीतर प्राथमिक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने स्पष्ट किया कि समिति अधिक शिकायतों की प्रतीक्षा में अपनी जांच अनिश्चितकाल तक न टाले. कोर्ट ने वकीलों को मौजूद सबूत सौंपने और पीड़ितों के पक्ष में आई शिकायतों पर भी तेजी से एक्शन लेने को कहा है.

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दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों और बर्बरता की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने मामले की जांच कर रही हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर अपनी प्राथमिक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट दाखिल करे. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि कमेटी को और ज्यादा शिकायतों के आने के इंतजार में अपना काम अनिश्चितकाल के लिए नहीं टालना चाहिए. पीठ ने निर्देश दिया कि कमेटी के पास जो भी सामग्री वर्तमान में उपलब्ध है, उसी के आधार पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाए और अदालत द्वारा तय किए गए दो प्राथमिकता वाले मुद्दों पर रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों और अन्य संबंधित पक्षों से कहा कि उनके पास जो भी शिकायतें, वीडियो या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, उन्हें तुरंत कमेटी को भेजा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा सामग्री जमा करने के दावों और कमेटी तक वास्तव में पहुंची सामग्री के बीच बड़ा अंतर है, क्योंकि पोर्टल और भौतिक माध्यमों से समिति को काफी कम शिकायतें मिली हैं.

CJI की बैंच ने क्या की टिप्पणी?

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़ितों की ओर से वकीलों या जागरूक नागरिकों द्वारा भेजी गई सामग्री और शिकायतों की भी पूरी जांच की जानी चाहिए, भले ही पीड़ित खुद सीधे समिति के सामने न पहुंचे हों. पीठ ने टिप्पणी की कि 31 अक्टूबर को कमेटी द्वारा दाखिल दस्तावेज महज एक ‘स्टेटस रिपोर्ट’ था, जिसमें आरोपों पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक गोपनीयता बनाए रखने के कोई असाधारण कारण न हों, तब तक कमेटी को अपने प्रासंगिक निष्कर्ष पक्षों के साथ साझा करने चाहिए. शीर्ष अदालत इस मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद करेगी.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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