सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मंगलवार को राहुल गांधी से जुड़ी एक याचिका को लेकर एक वकील को फटकार लगाई है. वकील ने बिना किसी आधार के राहुल गांधी के खिलाफ कथित ‘आय से अधिक संपत्ति’ का मामला उठाया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने आदेश पर पहले ही रोक लगा रखी है. साथ ही ED और CBI को भी हाई कोर्ट के सामने कोई रिपोर्ट दाखिल करने से मना कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के पीछे न तो कोई स्पष्ट आधार है और न ही इसमें कोई ठोस दम है.
वकील की क्या थी दलील?
वकील ने दावा किया कि राहुल गांधी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि वे ED और CBI के 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं. इसी आधार पर वकील ने इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की.
इसके जवाब में सीजेआई ने पूछा, ‘क्या आपने इस बारे में किसी न्यूज चैनल से सलाह ली है? आप बस मीडिया का ध्यान खींचने के लिए यह मुद्दा उठाना चाहते हैं.’ साथ ही उन्होंने अपने स्टाफ को यह भी निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट में केस ‘मेंशनिंग’ प्रोसेस की लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर दी जाए.
SC ने लगाई थी HC के फैसले पर रोक
बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त महीने में ही इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के मई महीने के एक आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. इस आदेश में CBI और ED को राहुल गांधी की संपत्ति की जांच करने का निर्देश दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि हाई कोर्ट राहुल गांधी का पक्ष सुने बिना ऐसा आदेश कैसे दे सकता है.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को निर्देश दिया कि वे फिलहाल इस मामले से जुड़ी कोई भी रिपोर्ट हाई कोर्ट में दाखिल न करें. यह पूरा मामला कर्नाटक के BJP कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की एक शिकायत से शुरू हुआ था. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संपत्ति को लेकर कई आरोप लगाए थे. कोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता, CBI और ED से जवाब मांगा था. राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी और इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी.