ग्लोबल वेदर पैटर्न ‘सुपर अल नीनो’ पूरी दुनिया पर मौत बनकर टूटने वाला है, क्योंकि इसके कारण पूरी दुनिया में इतनी भीषण गर्मी पड़ेगी कि साढ़े 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होने की आशंका है. ‘सुपर अल नीनो’ का खौफनाक असर अगले 5 महीने में ही दिख सकता है और भारत भी ‘सुपर अल नीनो’ के कारण डेथ रिस्क वाले देशों में शामिल है. ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ ने सुपर अल नीनो को लेकर एक नक्शा जारी किया है, जो पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़े खतरे की घंटी है. मैप के अनुसार सुपर अल नीनो का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. भारत समेत कई देश इसकी चपेट में आएंगे.
अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच खतरा बढ़ेगा
‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ के ‘अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर’ नामक नक्शे के अनुसार, प्रशांत महासागर में ‘सुपर अल नीनो’ एक्टिव है और इससे समुद्र के अंदर की सतह इतनी गर्म होगी कि पानी भी गर्म हो जाएगा और गर्म हवाएं भाप बनकर धरती की तरफ उड़ेंगी. अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच ऐसा होगाा, जिससे प्रशांत महासागर के आस-पास बसे देशों में भयंकर गर्मी पड़ेगी, जो जानलेवा साबित होगी. गर्मी से करीब 373000 से ज्यादा जानें जा सकती हैं. जिसमें से एक-तिहाई मौतें नाइजीरिया, भारत और ब्राजील में हो सकती हैं. सुपर अल नीनों का असर भारत पर सीधा पड़ने के आसार हैं.
3.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ा समुद्र की सतह का पारा
‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ के अनुसार, सुपर अल नीनो बहुत बड़े खतरे की घंटी है, क्योंकि इसने पूर्वी-मध्य प्रशांत महासागर के पानी के तापमान को सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस (6 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा) से ज्यादा कर दिया. 18 से 24 अक्टूबर के बीच समुद्र की सतह का तापमान इतना था. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, नवंबर से जनवरी के बीच इस तापमान में 6 गुना ज्यादा इजाफा हो सकता है, जिसके चलते इतनी गर्मी बढ़ेगी कि धरती तक जलने लगेगी. इंसान झुलस जाएंगे और जानवर तो जलकर राख हो जाएंगे. यानी सुपर अल नीनो के भयानक विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे
9 महीनों में 857400 अतिरिक्त मौतों की आशंका
मैप के अनुसार, सुपर अल नीनो के असर के बारे में पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने 1996 से 2005 के बीच बने अल नीनो के असर का अध्ययन किया. दुनियाभर के 3700 इलाकों में रिसर्च की गई थी, जो प्रशांत महासागर और अल नीनो के दायरे में आते हैं. हर महीने रिसर्च को अपडेट किया जाता है और अगले 6 महीने के लिए मौसम के पूर्वानुमान दिए गए. इसी पूर्वानुमान के अनुसार, सुपर अल नीनो जून 2026 में शुरू हुआ था और मार्च 2027 तक भीषण गर्मी पड़ेगी, जिससे पूरी दुनिया में 857400 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं, जो वैज्ञानिकों के अनुमान से 350000 ज्यादा है.
भारत समेत इन देशों में जाएंगी सबसे ज्यादा जानें
सुपर अल नीनो के असर से 9 महीनों में जितनी मौतें होने की आशंका है, उसमें आधी से ज्यादा मौतें अगले 6 महीने में होने की आशंका है. भीषण गर्मी का सबसे घातक असर नाइजीरिया पर पड़ सकता है, जहां 56000 से ज्यादा मौतें हो सकती हैं. नाइजीरिया के बाद भारत में भीषण गर्मी पड़ेगी, जिससे 55200 लोगों की जान जाने की आशंका है. इसके बाद इंडोनेशिया में 29300, ब्राजील में 19500, सूडान में 14700 लोगों की जान जाने का खतरा है. लेकिन नक्शा देखकर सरकारें अनुमान लगा सकती हैं कि जानलेवा गर्मी सबसे ज्यादा कहां पड़ेगी, ताकि लोगों की जान बचाने के उपाय किए जा सकें.
अल नीनो से निपटने के लिए पहले से तैयार रहें देश
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में अर्थशास्त्र के मिल्टन फ्रीडमैन डिस्टिंग्विश्ड सर्विस प्रोफेसर, माइकल ग्रीनस्टोन कहते हैं कि सुपर अल नीनो और इसके असर का पूर्वानुमाल लगाकर नक्शा इलिए जारी किया गया है, ताकि पता चले कि कहां के लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं, ताकि लोगों की जान बचाने के लिए पहले से तैयार की जा सके. जून के बाद से अब तक सुपर अल नीनो के कारण इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगी. भारत में मानसून सीजन में बारिश ही नहीं हुई. मध्य अमेरिका में सूखा पड़ा और अब दक्षिणी पश्चिमी अमेरिका में और भयानक तूफान और बारिश आने की आशंका है.