450000 जिंदगियों पर ‘महासंकट’, कैसे अगले 6 महीने में खतरनाक होगा सुपर El Nino?

‘सुपर एल नीनो’ को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जो फरवरी 2027 तक खतरनाक साबित हो सकता है. भारत समेत 11 देशों के लिए चेतावनी जारी हुई है कि उत्तरी गोलार्ध के देशों में साढ़े 4 लाख लोगों की मौत हो सकती है.

EL Nino | Weather Pattern | Scentists Warning

एल नीनो दिसंबर 2026 तक चरम पर होगा और फरवरी 2027 तक बना रहेगा. (Credit- AI)

प्रशांत महासागर में बना वेदर पैटर्न ‘सुपर एल नीनो’ अगले 6 महीने में दुनियाभर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. इसके कारण भारत समेत दुनियाभर के 11 देशों में करीब साढ़े 4 लाख लोगों की मौत हो सकती है. यह चेतावनी वैश्विक अनुसंधान सहयोग संगठन शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के द्वारा एक रिपोर्ट जारी करके दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 से अगस्त 2027 के बीच भयंकर गर्मी के कारण लोगों की जान जा सकती है. भारत में करीब 16000 लोगों की मौत हो सकती है. क्योंकि सुपर एल नीनो के कारण वैश्विक तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री ज्यादा रहेगा. 20 साल बाद अगले 6 महीने में सामान्य वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत ज्यादा गर्म दिन होने की संभावना है.

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जलवायु परिवर्तन के कारण बिगड़ गया धरती का संतुलन

रिपोर्ट के अनुसार, एल नीनो जलवायु परिवर्तन के कारण खतरनाक और शक्तिशाली साबित हो सकता है. क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण बेमौसमी बारिश और प्राकृतिक आपदाएं हुईं, जिससे धरती का संतुलन बिगड़ गया. इसलिए फसलों के खराब होने से सूखा, भुखमरी और बीमारियां फैलीं, जिन्होंने लोगों की जान ली.संयुक्त राष्ट्र (UN) और ब्रिटेन के मौसम वैज्ञानिक भी चेतावनी दे चुके हैं कि एल नीनो पिछले कई सालों में सबसे मजबूत होगा और वैश्विक समुद्री तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचेगा, जिससे गर्मी बढ़ेगी और दुनियाभर में लोगों की जान जाएगी. लेकिन एल नीनो की चपेट में आने वाले देश चेतावनी को गंभीरता से लेकर एहतियाती कदम उठाकर लोगों की जिंदगी बचाने का प्रयास कर सकते हैं.

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भारत समेत 11 देशों में लोगों की मौत होने की आशंका

शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब एक रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है, जो जलवायु विज्ञान, अर्थशास्त्र और डेटा एनालिसिस करके मौसम को लेकर भविष्यवाणी करती है. मौसम वैज्ञानिक माइकल ग्रीनस्टोन की टीम ने 1996-2025 को आधार वर्ष मानते हुए शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया और अतिरिक्त गर्मी से संबंधित भविष्यवाणी की. जिसके अनुसार, भारत में करीब 16 हजार लोग मारे जाएंगे. जिनमें से 7500 मौतें दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच हो सकती हैं. वहीं नाइजीरिया में 31400, सूडान में 17500, नाइजर में 10000 और चाड में 8000 मौतें हो सकती हैं. फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में 19400 मौत हो सकती हैं. इंडोनेशिया में 19300, ब्राजील में 13300 लोगों की जान जा सकती है.

2027 में खतरा साबित हो सकता है मजबूत एल नीनो

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, एल नीनो अभी चरम पर नहीं पहुंचा है, लेकिन दिसंबर तक यह मजबूत होकर सुपर एल नीनो बनेगा और साल 2027 में भी खतरा बन सकता है. 3 सितंबर को एल नीनो वेदर पैटर्न बन चुका है, जो नवंबर-दिसंबर तक चरम पर पहुंचेगा. फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना 100% है. अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के अनुसार, एल नीनो के कारण समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री ज्यादा है, जबकि पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तापमान 3 डिग्री से ज्यादा हैं. उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों के मौसम में मजबूत एल नीनो बनने की संभावना 90% है. भारत और पाकिस्तान में गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी के कारण जानें खतरे में पड़ेंगी.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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