विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक बार फिर सदन की जिम्मेदारी संभाल ली है. अपनी कुर्सी पर लौटते ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही केवल तय नियमों और प्रक्रियाओं के आधार पर ही चलती है. बिरला ने कहा कि उनके खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर सदन में पूरे 12 घंटे तक मैराथन चर्चा हुई. इस दौरान विपक्ष ने उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि सदन में विपक्षी सदस्यों की आवाज को दबाया जा रहा है.
भावुक हुए ओम बिरला
स्पीकर ने सदन को संबोधित करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि यह लोकसभा देश के 140 करोड़ नागरिकों की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी हमेशा यह कोशिश रही है कि सदन के हर सदस्य को अपनी बात रखने का पूरा और बराबर अवसर मिले. उन्होंने बताया कि वे केवल अनुभवी सांसदों को ही नहीं, बल्कि उन नए सदस्यों को भी बोलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते हैं जो कार्यवाही में भाग लेने से हिचकिचाते हैं. बिरला के अनुसार सदन की गरिमा को बनाए रखना हर सदस्य की सामूहिक जिम्मेदारी है.
माइक बंद करने के आरोपों का सच
विपक्ष की ओर से बार-बार लगने वाले माइक बंद करने के आरोपों पर स्पीकर ने विस्तार से सफाई दी. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर माइक्रोफोन को ऑन या ऑफ करने के लिए कोई स्विच या बटन मौजूद नहीं होता है. इस तकनीकी तथ्य की पुष्टि खुद विपक्ष के वे सदस्य भी कर सकते हैं जो समय-समय पर पीठासीन अधिकारी की भूमिका निभाते हैं. उन्होंने समझाया कि सिस्टम ऐसा है कि माइक्रोफोन केवल उसी सदस्य का सक्रिय होता है जिसे अध्यक्ष द्वारा बोलने की अनुमति दी गई होती है.
सदन में निष्पक्षता और नियमों का पालन
ओम बिरला ने सदन को भरोसा दिलाया कि उनका हर फैसला निष्पक्ष होता है और वे नियमों से बंधे हुए हैं. उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के माननीय सदस्य खुद चेयर पर बैठते हैं, तो वे भी जानते हैं कि प्रक्रियाएं कैसे काम करती हैं. अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि सदन की कार्यवाही अधिक सुचारू रूप से चलेगी. स्पीकर ने सभी सदस्यों से अपील की कि वे जनता के मुद्दों को उठाने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करें और सदन के समय का सदुपयोग करें.