भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर एक और फैसला किया है. आयोग ने फॉर्म-6 से अवैध बताए गए विवादित SIR की घोषणा वाले कॉलम को हटा दिया है. यह कॉलम नए वोटर्स के लिए वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए था, लेकिन अब इस कॉलम को हटा दिया गया है, बल्कि अब नए मतदाताओं को ECINet पोर्टल पर वोटर रजिस्ट्रेशन और SIR के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने होंगे. चुनाव आयोग ने पिछले 6 हफ्ते में तीसरी बार अपना फैसला बदला है.
जहां SIR जारी, वहां भी लागू होगा नया फैसला
चुनाव आयोग के नए फैसले के अनुसार, जिन राज्यों में SIR जारी है, वहां भी नए वोटर्स को ECINet पोर्टल पर फॉर्म-6 और SIR फॉर्म अलग-अलग भरना होगा. अब से पहले फॉर्म-6 में ही SIR से जुड़ी घोषणा वाला कॉलम था और उस कॉलम को भरना मैंडेटरी था. लेकिन फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी घोषणा वाले कॉलम को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी. दोनों ने कॉलम को गैर-कानूनी और नियमों के खिलाफ बताया था, इसलिए कॉलम को हटाया गया है
जानें फॉर्म-6 में अब क्या बदलाव किया गया है?
बता दें कि ECINet पोर्टल पर फॉर्म-6 भरकर नया वोट बनवाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जाता है. इस फॉर्म में चुनाव आयोग ने सेक्शन J और K के बीच SIR से जुड़ी घोषणा वाला कॉलम जोड़ा गया था, जिसके तहत दिए गए 3 विकल्पों में से एक विकल्प आवेदक को चुनना होता था. इसमें आवेदक को बताना होता था कि क्या उसका नाम 2000 के बाद हुए SIR के दौरान मतदाता सूची में था? क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का नाम उस मतदाता सूची में था?
क्या उसका और उसके माता-पिता का नाम पिछली SIR वाली मतदाता सूची में नहीं था? अब तक इन तीनों में से किसी एक सवाल का जवाब दिए बिना आवेदक आगे नहीं बढ़ सकता था, लेकिन अब इस कॉलम को हटा दिया गया है. अब फॉर्म-6 से सिर्फ वोटर रजिस्ट्रेशन होगा. SIR के लिए पोर्टल पर अलग फॉर्म उपलब्ध करा दिया गया है. सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ऑर्डर की कॉपी भेज नए फैसले के बारे में बता दिया गया है. जहां SIR जारी है, वहीं भी आदेश लागू होगा.
पिछले 6 हफ्तों में कई फैसलों में किया बदलाव
फॉर्म-6 और SIR को लेकर 23 सितंबर को आई रिपोर्ट के बाद अब तक 6 हफ्तों में आयोग ने कई बड़े फैसले किए हैं. जैसे चुनाव आयोग की बैठकों का नियम बदला गया है और अब हर हर बैठक से पहले एजेंडा शेयर किया जाएगा. साथ ही बैठक के बाद मिनट्स जारी किए जाएंगे. क्योंकि चुनाव आयुक्तों ने पहले ऐसा न होने की शिकायत की थी. अब विदेश दौरों के लिए चुनाव आयोग की मंजूरी अनिवार्य होगी, क्योंकि चुनाव आयुक्तों ने परमिशन के बिना विदेश दौरे करने पर आपत्ति जताई थी.
नया IT सिस्टम बनेगा, जिसके तहत IT मॉड्यूल और पोर्टल की जांच पहले अधिकारियों की कमेटी करेगी. उसके बाद आयोग से मंजूरी लेकर उन्हें लॉन्च किया जाएगा. 14 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी करके ECINet पोर्टल की जांच के लिए एक कमेटी बनाने का ऐलान किया गया, जो यह देखेगी कि पोर्टल कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं. कमेटी को वरिष्ठ उपचुनाव आयुक्त लीड करेंगे. IIT बॉम्बे और IISC बेंगलुरु के 2 एक्सपर्ट भी इस कमेटी के सदस्य होंगे.
बता दें कि ECINet सॉफ्टवेयर में एक बदलाव किया जाएगा, जिसके जरिए ERO को पहले से ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे. महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम ने सॉफ्टवेयर में 4 अहम बदलाव करने की मांग की थी, जिन्हें मान लिया गया है. अब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर डॉक्यूमेंट कलेक्ट करेंगे. इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) विसंगतियों और आपत्तियों से जुड़े मामलों पर खुद फैसला ले सकेंगे. जिला निर्वाचन अधिकारी के पास मामला भेजना जरूरी नहीं होगा.