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राष्ट्रपति भवन में गूंजी शौर्य की गाथा, छत्तीसगढ़ के दो जांबाज पुलिस अफसरों को मिला शौर्य चक्र

Shaurya Chakra Winners 2026: राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में देश के बहादुर जांबाजों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. छत्तीसगढ़ के दो जांबाज पुलिस अफसरों ने सूझबूझ से न सिर्फ 200 जवानों की जान बचाई, बल्कि नक्सलियों का सफाया भी किया. वहीं, सेना के मेजर और सीआरपीएफ के जवानों ने भी अदम्य साहस का परिचय देते हुए खूंखार आतंकियों और उग्रवादियों को ढेर कर दिया.

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Shaurya Chakra Winners 2026: सोमवार को राष्ट्रपति भवन देश के शूरवीरों की वीरता की गाथा से गूंज उठा. इस खास मौके पर देश के राष्ट्रपति ने अपने परम साहस और अदम्य वीरता का प्रदर्शन करने वाले जांबाजों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया. शौर्य चक्र पाने वालों में सेना के अधिकारियों से लेकर अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस के बहादुर जवान शामिल हैं. इस समारोह में छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट और इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख को शौर्य चक्र से नवाजा गया. इन दोनों बहादुर अधिकारियों ने 16 अप्रैल 2024 को एक बड़े एंटी-नक्सल अभियान का नेतृत्व किया था.

ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने पुलिस बल पर घात लगाकर (गोरिल्ला) हमला कर दिया था. लेकिन दोनों इंस्पेक्टरों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत रणनीति बदली और तीन घंटे से अधिक समय तक चली भीषण मुठभेड़ का नेतृत्व किया. उनकी इस बहादुरी के कारण 200 जवान सुरक्षित बच गए. इस दौरान चार जवान घायल जरूर हुए, लेकिन उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. इस सफल कार्रवाई में कई नक्सली मारे गए, जिसे छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े एंटी-नक्सल अभियानों में से एक माना जाता है.

मेजर आदित्य और मेजर आशीष ने अकेले संभाला मोर्चा

राजपुताना राइफल्स के मेजर आदित्य प्रताप सिंह को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में उग्रवादियों की घुसपैठ नाकाम करने के लिए 72 घंटे तक लगातार निगरानी की. महज 30 मीटर की दूरी से हो रही गोलीबारी के बीच उन्होंने अकेले मोर्चा संभाला और अपनी जान पर खेलकर एक मोस्ट वांटेड उग्रवादी को मार गिराया. वहीं, पैरा रेजिमेंट के मेजर आशीष कुमार को 2 नवंबर 2020 को आतंकियों के खिलाफ चलाए गए एक ऑपरेशन के लिए शौर्य चक्र मिला. उन्होंने भारी गोलीबारी के बीच दो सशस्त्र आतंकवादियों को ढेर कर दिया था, जिनमें एक A++ श्रेणी का कुख्यात आतंकी भी शामिल था.

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घायल होने के बाद भी आतंकी को ढेर कर गए CRPF के जवान

सीआरपीएफ (CRPF) के सिपाही जीडी संजय तिवारी और सिपाही फिदा हुसैन डार ने भी अद्भुत साहस का परिचय दिया. 2 नवंबर 2024 को श्रीनगर के खनियार इलाके में एक विदेशी आतंकी के छिपे होने की सूचना पर दोनों ने तुरंत उस मकान को घेर लिया. आतंकी की ओर से की गई गोलीबारी और ग्रेनेड हमले में घायल होने के बावजूद दोनों ने हौसला नहीं खोया और नजदीकी मुकाबले में उस विदेशी आतंकी को मार गिराया. इस असाधारण वीरता के लिए सिपाही जीडी संजय तिवारी को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया.

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