चुनाव आयोग पर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के बीच बीजेपी ने पलटवार किया है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से विपक्ष लगातार जनता के बीच अपनी पकड़ खोता गया है और अब अपनी हार का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ रहा है. संबित पात्रा ने कहा कि जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रहे, तो उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाना शुरू कर दिया.
चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर क्या बोले संबित पात्रा?
संबित पात्रा ने विपक्ष पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हार की बौखलाहट में विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और इसे लेकर एक तरह का भ्रामक प्रचार किया जा रहा है. उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से जारी एक विस्तृत नोट का भी जिक्र किया. बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, आयोग के भीतर लिए जाने वाले फैसले लोकतांत्रिक और तय संस्थागत प्रक्रिया के तहत होते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में अलग-अलग मुद्दों पर अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श और अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. अंतिम फैसला लेने से पहले अधिकारियों के बीच चर्चा होती है और इसके बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाते हैं. संबित पात्रा ने कहा कि आयोग का हालिया नोट इस बात को स्पष्ट करता है कि चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर चर्चा और विचार-विमर्श होता है. उनके मुताबिक, लंबी चर्चा के बाद सभी आयुक्त एक राय पर पहुंचते हैं.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बुधवार को द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कम से कम 14 फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे. रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और सरकार को भी निशाने पर लिया. इसके बाद चुनाव आयोग ने अपनी ओर से सफाई जारी की.
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है. अंतिम फैसला लेने से पहले अधिकारियों के बीच चर्चा होती है. आयोग ने यह भी कहा कि चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हर अधिकारी को अपनी राय और सुझाव रखने का पूरा अधिकार है. आयोग के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कई आंतरिक टिप्पणियां और फैसले सामने आए हैं, लेकिन किसी एक टिप्पणी या तस्वीर को पूरी प्रक्रिया का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता. आयोग ने बताया कि हाल के महीनों में मतदाता सूची में सुधार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई फैसले लिए गए हैं. उसके अनुसार, इनमें से कई फैसले पिछले एक साल में आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों के परिणाम हैं.
संबित पात्रा ने भी इसी बात का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग किसी तानाशाही व्यवस्था की तरह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नियमों और संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर अधिकारियों के बीच चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसे आयोग के भीतर मतभेद या किसी फैसले पर सवाल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. यानी, एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग के फैसलों और उसकी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी और चुनाव आयोग का कहना है कि संस्थान में होने वाला विचार-विमर्श उसकी सामान्य और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है.