समय के साथ कैसे बदली विदेश नीति? एस जयशंकर ने क्रिकेट की भाषा में समझाया

S Jaishankar Explained Indian Foreign Policy: भारत की विदेश नीति ने भी बदलते वक्त के साथ करवट ले ली है। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए भारतीय विदेश नीति को समझाया है।

Jaishankar on Indian Foreign Policy

S Jaishankar Explained Indian Foreign Policy: भारत अपनी विदेश नीति के कारण अक्सर सुर्खियों में रहता है। वहीं देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर को भला कौन नहीं जानता? मोदी मंत्रिमंडल के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार एस.जयशंकर अपनी शानदार डिप्लोमैसी के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में कैसा रहे अगर विदेश मंत्री ही विदेश नीति समझाने लगें, वो भी क्रिकेट की भाषा में?

विदेश मंत्री ने क्या कहा?

दरअसल विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ की आत्मकथा ‘फियरलेस’ का विमोचन करते हुए विदेश मंत्री ने कई बड़े मुद्दों पर बात की। विदेश मंत्री ने मोहिंदर अमरनाथ की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आपने कहा पारंपरिक साइन ऑन पेजिशन से हटकर आपने ओपन चेस्टेड पेजिशन पर खेला। उस समय पाकिस्तान की जो नीतियां थी, उसके लिए भी मुझे इससे बेहतर उदाहरण नहीं मिल सकता। यह लाइन भारत की विदेश नीति पर बिल्कुल सटीक बैठती है।

1983 वर्ल्डकप का किया जिक्र

एस. जयशंकर ने कहा कि मोहिंदर अमरनाथ की इस किताब में ऐसी कई चीजें हैं, जो देश की विदेश नीति को बखूबी जाहिर करती हैं। पहली बात यह है कि दुनिया में कॉम्प्टीशन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इन सबके बीच भारत ने समय के साथ सम्मान कमाया है। विदेश मंत्री ने 1983 का जिक्र करते हुए कहा कि क्लाइव लॉयड की खतरनाक गेंदबाजी से कोई नहीं बचा है। उन्होंने अपनी बॉडी लाइन गेंदबाजी से किसी को नहीं बख्शा है। वो उस समय टीम के कप्तान थे और उन्होंने पिच को अनफिट घोषित कर दिया था। एस. जयशंकर के अनुसार 1983 का दौर काफी यादगार था। यह फैसले की घड़ी थी। ऐसे में कभी लगता था कि पाकिस्तान जीतेगा और कभी श्रीलंका। इसी बीच क्रिकेट के क्षेत्र में इतिहास रचा गया और 1983 के वर्ल्डकप की ट्रॉफी भारत के हिस्से में आ गई।

कौन हैं मोहिंदर अमरनाथ

बता दें कि मोहिंदर अमरनाथ का नाम देश के मशहूर क्रिकेटरों में शुमार है। 1969-1989 तक वो टीम इंडिया का हिस्सा रहे। इस दौरान उन्होंने 11 शतकों के साथ 4,378 रन बनाए। 1983 के वर्ल्डकप मैच में न सिर्फ सेमीफाइनल बल्कि फाइनल में उन्हें मैन ऑफ द मैच की ट्रॉफी मिली। इसके बाद उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

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