Clean Air Mission: भारत के ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ में काफी पैसा खर्च करने के बावजूद इसके नतीजे सीमित रहे हैं. इस पहल के तहत शामिल 130 शहरों में से सिर्फ 21 शहर ही 2025-26 तक PM10 प्रदूषण को 40 फीसदी से ज्यादा कम करने में सफल रहे हैं. ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) के एक आकलन से पता चला है कि इस प्रोग्राम के तहत जारी किए गए 16824 करोड़ रुपये में से 12087 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.
117 शहर स्टैंडर्ड फॉलो नहीं कर रहे
2019 में शुरू किए गए NCAP का मकसद उन शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है, जो लगातार राष्ट्रीय प्रदूषण मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं. एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत में इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2017-18 के बेसलाइन की तुलना में 2024-25 तक PM10 के लेवल में 20-30 फीसदी की कमी लाना था. बाद में इस लक्ष्य को बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया, या फिर 2025-26 तक 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की राष्ट्रीय सलाना सीमा का पालन करने का लक्ष्य रखा गया.
‘सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड’ (CPCB) के डेटा और सरकार के ‘PRANA’ पोर्टल के CREA की तरफ किए गए विश्लेषण के मुताबिक, आवंटित फंड का तकरीबन 72 फीसदी हिस्सा खर्च किया जा चुका है. हालांकि 117 शहर, यानी जिन शहरों का आकलन किया गया उनमें से लगभग 90 फीसदी अभी भी PM10 की निर्धारित सालाना लिमिट से ऊपर हैं.
खर्च के बावजूद 23 शहरों में प्रदूषण बढ़ा
इस आकलन में पाया गया कि 44 शहरों में PM10 के स्तर में 30 फीसदी से ज्यादा की कमी आई, जबकि 21 शहरों में यह कमी 40 फीसदी से ज्यादा रही. हालांकि 2 शहरों में प्रदूषण का स्तर पहले जैसा ही रहा, जबकि 23 अन्य शहरों में पॉल्यूशन बढ़ गया.
चेन्नई, जयपुर और बेंगलुरु उन शहरों में शामिल हैं, जहां भारी खर्च के बावजूद प्रदूषण का स्तर बढ़ा है. चेन्नई ने 449 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन वहां 2017-18 की तुलना में PM10 की मात्रा 9.1 फीसदी बढ़ गई. जयपुर ने 353 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि बेंगलुरु ने 313 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया. PM10 के स्तर में 24.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज होने के बावजूद, पुणे ने 289 करोड़ रुपये खर्च किए.
कैसे कम होगा प्रदूषण?
CREA के एनालिस्ट मनोज कुमार ने एचटी से कहा कि इस प्रोग्राम के अगले फेज में राज्य-स्तरीय और क्षेत्रीय योजनाओं को शामिल किया जाना चाहिए, जो शहर की सीमाओं के पार प्रदूषण के सोर्सेज को चेक करें. उन्होंने फैक्ट्री, पावर प्लांट, परिवहन और घरेलू ईंधन के उपयोग के लिए उत्सर्जन कम करने के मापने योग्य लक्ष्य तय करने का सुझाव दिया. साथ ही उन्होंने PM10 और PM2.5 प्रदूषकों के लिए भी अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित करने की सिफारिश की.