हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

एक सीध में कदम ताल, एक साथ उठते सैकड़ों हाथ… 90 मिनट की परेड के लिए कैसे 180 दिन मेहनत करते हैं जवान?

गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरी दुनिया ने भारत की सेना का शौर्य देखा। करीब 90 मिनट की परेड के लिए भारतीय सेना कब से तैयारी में जुट जाती है। कैसे सर्दी के मौसम में भी खून पसीना एक करके दुनिया के सामने अपना लोहा मनवाने के लिए खुद को तैयार करती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

विज्ञापन

26 जनवरी दिल्ली में धूमधाम से गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। कर्तव्य पथ पर सेना ने अपना शौर्य दिखाया। सेना के कदम ताल की गूंज पड़ोसी देशों तक सुनाई दी। पूरी दुनिया ने भारत की सेना का शक्ति प्रदर्शन देखा। परेड में सेना की कई टुकड़ियों ने अपना शौर्य दिखाया। लेकिन आपने सोचा है कि 26 जनवरी पर कर्तव्य पथ पर जो परेड होती है। उसके पीछे क्या तैयारी होती है। करीब 90 मिनट की परेड के लिए भारतीय सेना कब से तैयारी में जुट जाती है। कैसे सर्दी के मौसम में भी खून पसीना एक करके दुनिया के सामने अपना लोहा मनवाने के लिए खुद को तैयार करती है।

26 जनवरी को सभी भारतीय दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हो रही परेड को जरूर देखते होंगे। कुछ देर का कार्यक्रम और सेना का प्रदर्शन, कुछ देर लोगों की मौजूदगी और फिर कर्तव्य पथ पर सन्नाटा। टीवी और ऑनलाइन तो ये आयोजन कुछ ही देर का होत है लेकिन कैमरे के पीछे 180 दिन यानी 6 महीनों की मेहनत होती है। 26 जनवरी की इस परेड में आर्मी, नेवी, एयरफोर्स, कोस्ट गार्ड के साथ सीएपीएफ के कई जवान शामिल होते हैं। आपको लग सकता है कि परेड की तैयारी जनवरी में शुरू होती है लेकिन ऐसा नहीं है। इसकी नीव जुलाई-अगस्त में ही पड़ जाती है। सेना पिछले 6 महीने से अपने आप को परेड में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना शुरू कर देती है।

यह भी पढ़ें: कॉम्बैट फॉर्मेशन, भैरव कमांडों, EU कूणनीति… गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार ये चीजें शामिल

विज्ञापन

देश भर की अलग-अलग रेजीमेंट से बेस्ट सैनिकों को चुना जाता है। यहां सिफारिश से नहीं सिर्फ परफेक्शन से काम चलता है। हाइट, फिटनेस और मार्चिंग का एक अंदाज एक साथ सब कुछ मापा जाता है। सोचिए एक जवान के लिए राजपथ यानी कर्तव्य पथ पर चलना किसी ओलंपिक मेडल जीतने से कम नहीं होता है। जब यह जवान दिल्ली पहुंचते हैं तो इनका असली इम्तिहान शुरू होता है। यह जवान सुबह 2 या 3 बजे अपने बिस्तर छोड़ देते हैं। सुबह 4 बजे पूरा शहर जब सो रहा होता है तब इंडिया गेट के पास इनके कदमों की आवाज गूंजने लगती है।

हर रोज 14 किमी पैदल

बता दें कि तैयारी के दौरान जवानों को 12 से 14 किमी हर रोज चलना होता है। रोज चलने के बाद भी मजाल है कि इनकी वर्दी पर एक भी सलवट आए। अपने भारी हथियारों को घंटों तक एक ही पोजीशन में थामे रखना आसान नहीं है। कई बार ठंड से हाथ शून्य पड़ जाते हैं लेकिन राइफल नीचे नहीं झुकती है। इस परेड में सबसे बड़ी चुनौती होती है सिंक्रोनाइजेशन यानी कि सबका हाथ एक साथ उठे, सबकी आंखें एक तरफ मुड़े।

विज्ञापन

इसके लिए एक रस्सियों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि कतार बिल्कुल सीधी रहे। अगर एक जवान का हाथ 90° पर है तो पूरी टुकड़ी का हाथ 90° पर ही होना चाहिए। अगर एक ने भी गलती की तो पूरी टुकड़ी का रिदमम बिगड़ जाता है। दाहिने का अगर आदेश आता है तो सैकड़ों सिर एक साथ कैसे घूमते हैं? यह हम सोचते हैं। लेकिन यह कई महीनों की प्रैक्टिस का नतीजा होता है।

1 सेकंड से बिगड़ता है फॉरेशन

कर्तव्य पथ पर आसमान में गरजते वो फाइटर जेट्स पायलट्स को सेकंड्स के हिसाब से अपनी टाइमिंग सेट करनी पड़ती है। 1 सेकंड की देरी और पूरा फॉरेशन बिगड़ सकता है। जमीन से लेकर आसमान तक हर कोई एक ही धुन में होता है। 26 जनवरी की परेड देखें तो याद रखिएगा कि वह सिर्फ एक शो नहीं है। वह हमारे सैनिकों के पसीने की वह बूंदे हैं जो देश के सम्मान के लिए बहाई गई है। इसके अलावा जवान ही नहीं वह खूबसूरत झांकियां जिन्हें हम देखते हैं उन्हें तैयार करने के लिए कलाकार राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में महीनों दिन रात एक कर देते हैं।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Republic Day 2026: कश्मीर से कन्याकुमारी तक तिरंगे के रंग में रंगा भारत, गर्व से बोला हर हिंदुस्तानी – ‘वंदे मातरम’

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Raghav Tiwari

राघव तिवारी न्यूज24 में शिफ्ट हेड की भूमिका निभा रहे हैं। यहां टीम प्रबंधन के साथ नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि की खबरें भी कवर करते हैं। इससे पहले ये अमर उजाला, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स (NBT) और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में रिपोर्टिंग कर चुके हैं। देवभूमि उत्तराखंड, इंदौर, नोएडा, कानपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम करने की वजह से राघव भिन्न-भिन्न कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत की समझ रखते हैं। राघव तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की है। शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Mail ID: raghav.tiwari@bagconvergence.in Contact No. 8840671098
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola