रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टेरिटोरियल आर्मी संसदीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी. इस मीटिंग के जरिए राजनाथ सिंह ने यह संदेश देने की कोशिश की देश का हर नागरिक सैनिक है और जरूरत पड़ने पर उसे भी आगे आने की जरूरत है. बैठक का मकसद प्रादेशिक सेना यानी टेरिटोरियल आर्मी था. अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में प्रादेशिक सेना के योगदान को महत्वपूर्ण बताया.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां रक्षा बलों की भूमिका मुख्य रूप से सुरक्षा-संबंधी पहलुओं के आस-पास ही घूमती है, वहीं प्रादेशिक सेना पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों जैसे दूसरे क्षेत्रों में भी योगदान देती है. उन्होंने कहा प्रादेशिक सेना नागरिक-सैनिक अवधारणा का जीवंत अवतार है. जबकि इसके सदस्य नागरिक गतिविधियों में संलग्न हैं, वे साथ-साथ सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए वर्दी पहनते हैं.
इस बात पर भी जोर दिया गया कि प्रादेशिक सेना प्रशिक्षित सैनिकों का एक रिजर्व बनाकर रक्षा बलों के लिए बढ़ती क्षमता बनाती है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जब कर्मी अपना कार्यकाल पूरा करते हैं और नागरिक जीवन में लौटते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक जीवंत पुल के रूप में कार्य करते हैं, युवाओं को रक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं.
क्या होती है टेरिटोरियल आर्मी
मेजर जनरल एसके सिंह के मुताबिक , टेरिटोरियल आर्मी यानी प्रादेशिक सेना भारतीय सेना का एक पार्ट-टाइम रिजर्व बल है. इस आर्मी में शामिल होने वाले आम नागरिक, नौकरीपेशा या बिजनेसमैन होते हैं, जो अपने रोजमर्रा के काम के साथ-साथ साल में कुछ हफ्तों के लिए डिफेंस की ट्रेनिग लेते हैं. जरूरत या आपातकाल के समय इन्हें देश की रक्षा के लिए बुलाया जाता है.
बता दें, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पैराशूट रेजिमेंट (106 पैरा टीए बटालियन) में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का रैंक मिला है. कपिल देव को भी प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि दी गई है. ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा को भी मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि मिली हुई है. अनुराग ठाकुर और सचिन पायलट जैसे नेता भी टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े हुए हैं. दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता मोहन लाल को भी प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का रैंक मिला है.
इन्हें देश की सुरक्षा की ‘सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस’ भी कहा जाता है. यह नियमित भारतीय सेना को शांति के समय के कामों से राहत देती है और जरूरत पर सहायता करती है . युद्ध, प्राकृतिक आपदा या आंतरिक सुरक्षा के संकट आने पर यह सिविल प्रशासन और सेना की मदद करती है.
डिफेंस सेक्टर और ज्यादा होगा मजबूत
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बैठक में क्षेत्रीय सेना के भविष्य के रोडमैप पर भी गहन चर्चा हुई है. सदस्यों ने इसकी विस्तार योजनाओं और आधुनिक सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारों पर विचार-विमर्श किया है. यह बैठक राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है. रक्षा मंत्री ने सदस्यों के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्रीय सेना देशभक्ति और राष्ट्र सेवा का अनुकरणीय उदाहरण है. रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे.
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