‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज पहुंचे, केपी कॉलेज मैदान में राहुल गांधी ने प्रयागराज को अपने परिवार का शहर बताते हुए केपी कॉलेज मैदान में छात्रों के साथ सीधी चर्चा की. तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए राहुल गांधी ने छात्रों को डेटा की अहमियत समझाई. उन्होंने कहा कि आज के दौर में आपके डेटा के बिना AI का कोई मतलब नहीं है. बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां आम जनता और युवाओं के डेटा के बल पर ही खड़ी हैं, इसलिए तकनीक के इस दौर में डेटा के अधिकार और उसकी सुरक्षा को समझना बेहद जरूरी है.
परिवारों से शिक्षा पर पैसा छीना जा रहा है
देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज मध्यमवर्ग और गरीब परिवारों से शिक्षा के नाम पर पैसा छीना जा रहा है. लगातार महंगी होती पढ़ाई और कोचिंग के भारी-भरकम खर्च ने आम परिवारों की कमर तोड़ दी है. भारी फीस चुकाने के बाद भी युवाओं को न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है और न ही रोजगार.
सिस्टम ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसाया
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था ने देश के युवाओं को एक चक्रव्यूह में फंसा दिया है. एक तरफ पेपर लीक की घटनाएं युवाओं की सालों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं, तो दूसरी तरफ पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरियां नहीं मिलतीं. उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए वे उनकी आवाज को संसद से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाएंगे.
‘रील देखना और बनाना 21वीं सदी का नया नशा’
युवाओं की दिनचर्या और सोशल मीडिया पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज युवाओं का बहुमूल्य डेटा छीनकर बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों को दिया जा रहा है. युवाओं को सिर्फ इस काम में उलझाकर रखा गया है कि वे दिन-रात रील देखें और रील बनाएं. उन्होंने इसे ’21वीं सदी का नशा’ करार देते हुए कहा कि युवाओं को असली मुद्दों से भटकाने के लिए यह माहौल तैयार किया गया है.
1000 में से केवल 12 को मिल रही पक्की नौकरी
राहुल गांधी ने युवाओं के सामने रोजगार के गिरते आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश में 1,000 युवाओं में से केवल 12 को ही स्थायी नौकरी मिल पा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारों से पढ़ाई के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाते हैं और बदले में बीए-एमए की डिग्री दे दी जाती है, लेकिन यह डिग्री रोजगार की कोई गारंटी नहीं देती. नौकरी के सारे दरवाजे—चाहे वह मैन्युफैक्चरिंग हो, स्टार्टअप हो या सरकारी क्षेत्र—एक-एक कर बंद किए जा रहे हैं.
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