Parliament Members Disqualification Explainer: संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के समय राहुल गांधी की स्पीच पर बवाल मचा। राहुल गांधी ने भारत-चीन के संबंधों को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए तो BJP वाले भड़क गए। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को बोलने ही नहीं दिया। विरोध जताते हुए कांग्रेस ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान कर दिया।
राहुल गांधी के खिलाफ आया सब्सटेंटिव मोशन
इधर कांग्रेस ने स्पीकर के खिलाफ अविश्ववास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा के महासचिव को दिया, उधर BJP ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का ऐलान कर दिया। हालांकि इस ऐलान को BJP ने वापस ले लिया, लेकिन BJP सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सब्सटेंटिव मोशन पेश कर दिया, जो अगर सदन में चर्चा के बाद बहुमत से पारित हो गया तो राहुल गांधी की संसद सदस्यता छिन सकती है।
राहुल गांधी पहले भी करार दिए जा चुके अयोग्य
बता दें कि संविधान में किए गए अलग-अलग प्रावधानों के तहत कार्रवाई होने पर 1951 से आज तक कई सांसद अपनी सदस्यता गंवा चुके हैं। 1988 से साल 2023 तक 42 सासंदों की सदस्तया छीनी जा चुकी है। सूची में इंदिरा गांधी का नाम भी है और राहुल गांधी पहले भी लोकसभा के लिए अयोग्य करार दिए जा चुके हैं। आइए जानते हैं कि किन-किन मामलों में संविधान के अनुसार कार्रवाई होने पर संसद की सदस्यता छीनी जा सकती है…
2 सदनों की सदस्यता हो तो एक रद्द होगी
बता दें कि अगर कोई सांसद लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों का सदस्य बन जाता है तो एक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ेगा। संविधान के अनुच्छेद 101 में इसका प्रावधान किया गया है कि दोनों सदनों का सदस्य बन जाने पर निश्चित समय के अंदर एक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर अयोग्य घोषित हो सकते हैं।
बिना बताए सदन से अनुपस्थित रहने पर
संविधान के अनुच्छेद 101 के अनुसार, अगर कोई सांसद बिना बताए 60 दिन या इससे ज्यादा समय तक सदन से एबसेंट रहता है तो उसकी सीट को खाली घोषित करते हुए उसकी संसद की सदस्यता खत्म की जा सकती है। इन 60 दिन में वह दिन काउंट नहीं गिने जाएंगे, जिन दिनों में सत्र 4 से ज्यादा दिन के लिए स्थगित हो या सेशन खत्म हो गया हो।
लाभ के किसी पद पर नियुक्त होने पर भी
संविधान का अनुच्छेद 102 के अनुसार, अगर कोई सांसद भारत सरकार या राज्य सरकार में किसी लाभ के पद पर नियुक्त है तो उसे संसद के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 102(1)(a) के अनुसार, सांसदों और अनुच्छेद 191(1)(a) के तहत विधानसभा सदस्यों को ऐसे लाभ के पद लेने की मनाही है। जनवरी 2018 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ऐसे मामले में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया था।
मानसिक अस्वस्थता या दिवालिया होने पर
अगर कोई सांसद दिवालिया घोषित हो जाए तो उसकी संसद की सदस्यता रद्द हो सकती है। वहीं अगर कोर्ट किसी मामले में किसी सांसद को मानसिक रूप से अस्वस्थ करार दे तो भी सांसदी खत्म हो सकती है।
देश की नागरिकता छोड़ने पर भी रद्द होगी
संविधान के अनुच्छेद 102 के अनुसार, अगर कोई सांसद भारतीय नागरिक न हो या भारत की नागरिकता छोड़कर किसी और देश की नागरिकता स्वीकार कर ले तो उसकी संसद की सदस्यता छीनी जा सकती है।
Question Hour: प्रश्नकाल में पूछे गए सवाल के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर क्या करते हैं सांसद?
एक पार्टी को छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने पर
संविधान के अनुच्छेद 102 के मुताबिक, 10वीं अनुसूची में दल बदलने पर सांसदी छीनने का प्रावधान है। अगर कोई सांसद या विधायक उस दल को छोड़कर, जिससे वह सांसद या विधायक है, कोई दूसरा दल जॉइन कर ले तो उसे संसद या विधानसभा के लिए अयोग्य करार दिया जा सकता है। साल 2016 में उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार के 9 विधायकों को अध्यक्ष ने ऐसे ही मामले में अयोग्य करार दे दिया था।
पार्टी के आदेश का उल्लंघन करने पर रद्द होगी
संविधान की 10वीं अनुसूची में प्रावधान है कि अगर कोई सांसद पार्टी के आदेशों का उल्लंघन करता है। अगर वह पार्टी की ओर से जारी व्हिप का अपमान करता है। किसी मुद्दे पर संसद में वोटिंग के दौरान आदेश न माने या अनुपस्थि रहे तो उसकी संसद की सदस्यता छीनी जा सकती है।
किसी मामले में जेल की सजा होने पर छिनेगी
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत प्रावधान किया गया है कि अगर किसी मामले में किसी सांसद को 2 साल या इससे ज्यादा की जेल की सजा हो जाए तो उसकी संसद सदस्यता छीनी जा सकती है। राहुल गांधी को सूरत कोर्ट ने मोदी सरनेम पर सवाल उठाने के विरोध में दर्ज मानहानि केस में 2 साल की सजा हुई थी तो उन्हें लोकसभा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। अगस्त 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी तो उसकी संसद सदस्यता भी बहाल हो गई थी।
चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर भी
चुनाव जीतने के बाद अगर पता चले कि सांसद ने चुनावी हलफनामे में जो जानकारी दी थी, वह गलत है तो इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा और संसद सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सदस्यता इसी वजह से रद्द की गई थी। 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार थी, तब विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पारित होने के बाद उनकी सदस्यता छीन ली गई थी।
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