महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के प्रसिद्ध ‘गोकुल दूध संघ’ के चुनाव परिणामों के बाद अब सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र की सरकार और BJP पर लोकतांत्रिक जनादेश का अपमान करने और नियमों में हेरफेर का गंभीर आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को चुनाव में हरा दिया है. इसके बाद सरकार ने नियम बदलते हुए 4 सरकारी डायरेक्टरों को शामिल करने का फैसला किया, ताकि 12 की संख्या को 16 बनाकर बहुमत छीना जा सके.
किसान कभी धोखे को भूलता नहीं
राहुल गांधी ने इसे दूध उत्पादकों के वोट की सीधी चोरी और जनादेश में मिलावट बताया. उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता बचाने के लिए भाजपा किसी भी हद तक जा रही है, लेकिन दूध उत्पादकों का हक छीनने वाले यह याद रखें कि किसान कभी भूलता नहीं है.
इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे. खेड़ा के अनुसार, हार के बाद महायुति समर्थित निदेशकों ने बैठक से नदारद रहकर चेयरमैन के चुनाव को टालने की कोशिश की, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया. आरोप है कि इसके बाद राज्य कैबिनेट ने वोटिंग अधिकार वाले 4 सरकारी डायरेक्टरों को मनोनीत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिससे चुनावी गणित को बदला जा सके.
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए बोर्ड को दरकिनार कर पिछले दरवाजे से सत्ता पर काबिज होने की कोशिश की जा रही है, जिसका दूध उत्पादक और किसान कड़ा विरोध करेंगे. कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या कोई सरकार सिर्फ इसलिए चुनाव के बाद नियम बदल सकती है क्योंकि उसे नतीजे पसंद नहीं आए? कांग्रेस ने सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता और किसानों के जनादेश की रक्षा के लिए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है.